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यह सरकारी पानी नहीं है

बचपन में एक कहानी पढ़ी थी- ठाकुर का कुआं। मुंशी प्रेमचंद की इस कहानी के कुएं का ‘मालिक’ किसी को अपने कुएं से पानी नहीं भरने देता था। लेकिन भागलपुर के चम्पानगर यह ‘निजी कुआं’ आज बहुतों की प्यास बुझा रहा है। बहुतों के लिए एक नजीर बन गया है। संवेदनहीनता और बाजारवाद के इस दौर में अब इसे इन्तेसार अंसारी का जुनून ही तो कहेंगे कि वे हर दिन कम से कम एक सौ परिवारों को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराते हैं। इसके एवज में वह किसी से धेला भी नहीं लेते।ड्ढr ड्ढr यह कहानी भागलपुर के वार्ड नम्बर दो(चम्पानगर )की है। इस इलाके में आजादी के साठ बरस बाद भी न पाइप लाइन बिछी ,न कोई और उपाय हुआ। लोग दूर-दूर से पानी लाते थे। बुनकर परिवार से आने वाले इन्तेसार से बुनकर बस्ती का यह दर्द देखा नहीं गया। उन्होंने खुद घर में बोरिंग करवाई और अब सुबह-शाम मोटा पाइप लेकर खुद बाहर निकलते हैं। गली में दूर-दूर तक लगी बत्तर्नों की खडख़ड़ के बीच उनमें पानी भरते हैं। यह सिलसिला तीन साल से चल रहा है। कभी व्यवधान नहीं हुआ। बिजली व्यवधान डालती है तो वे इसके लिए अपना जेनरटर चलाते हैं लेकिन लोगों को पानी जरूर देते हैं। इसके बदले में उन्हें एक भी धेला नहीं, बस लोगों की दुआएं ही मिलती है और वे इसी में खुश हैं। हम मान लेते हैं कि इस कड़ुए सच का पता अब तक न नगर निगम को है,न ही जल पर्षद को, न ही हमार सांसद या विधायक को। चलिए देर से ही सही क्या हम उम्मीद करं कि चम्पानगर को पानी मिलेगा। सरकारी पानी ।

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