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खाद्य सब्सिडी ने बढ़ाई चिदंबरम की चिंताएं

चौतरफा दबावों से घिरे वित्त मंत्री पी.चिदंबरम के लिए खाद्य सब्सिडी के बोझ ने नया सिर दर्द पैदा किया है। पहले से ही हाारों करोड़ रुपये की मार झेल चुके सरकारी खजाने पर अब खाद्य सब्सिडी 16 हाार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ डालने जा रही है। इससे राजकोषीय घाटे पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना तय है। चालू वित्त वर्ष के दौरान यह बोझ लगभग 50 हाार करोड़ रुपये पर पहुंचने जा रहा है। आर्थिक संपादकों के सम्मेलन को संबोधित करते हुये कृषि मंत्री शरद पवार ने स्वीकार किया कि चालू वित्त वर्ष के दौरान खाद्य सब्सिडी बोझ लगभग 50 हाार करोड़ रुपये पहुंच जाएगा। बजट अनुमानों में यह सिर्फ 34 हाार करोड़ रुपये है। ध्यान रहे कि खाद्य सब्सिडी बोझ भी उर्वरक और तेल सब्सिडी की ही तरह सरकार की नीतिगत जिम्मेदारी के अंतर्गत आता है। जाहिर है, इसका बोझ राजकोषीय घाटे पर और प्रतिकूल असर डालेगा। उर्वरक सब्सिडी का बोझ पहले से ही 30 हाार करोड़ रुपये से बढ़कर एक लाख करोड़ रुपये पहुंच चुका है। खाद्य सब्सिडी के बोझ में यह बढ़ोत्तरी विभिन्न जिंसों के बढ़े हुये न्यूनतम समर्थन मूल्य, खरीद लागत और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के खर्च में बढ़ोत्तरी है। पवार ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के दौरान किसानों को 1.20 लाख करोड़ रुपये के ऋण वितरण लक्ष्य के मुकाबले अक्टूबर माह तक 1.0लाख करोड़ रुपये का ऋण वितरण हो चुका है। बाकी 11 हाार करोड़ रुपये का वितरण जल्द होगा।

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