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दो साल में भी पूरी नहीं हुई जांच, आक्रोश बढ़ा

रांची यूनिवर्सिटी में अब तक पेंशन फंड से राशि विचलन के मामले की जांच पूरी नहीं हो सकी है। इससे पेंशनधारी शिक्षक और कर्मचारियों में आक्रोश बढ़ रहा है। पेंशनर समाज ने इस मामले को पुन: सीएम के पास ले जाने की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यूनिवर्सिटी जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति कर सीएम के निर्देशों का उल्लंघन कर रही है। मुख्यमंत्री अजरुन मुंडा के निर्देश पर रांची यूनिवर्सिटी ने 14 जुलाई 2006 को पेंशन फंड से राशि विचलन के मामले की जांच के लिए एक सदस्यीय कमेटी का गठन कर जांच की जिम्मेदारी वित्त पदाधिकारी डॉ एसके प्रसाद को सौंपी गयी थी। अजरुन मुंडा की सरकार के गिरते ही मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। यूनिवर्सिटी के रवैये से क्षुब्ध पेंशनर समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि जरूरत पड़ी, तो पुन: सीएम के पास जायेंगे। जुलाई 2006 में शिक्षकों के साथ हुई वार्ता में तत्कालीन सीएम अजरुन मुंडा ने भी माना था कि पेंशन फंड से राशि का विचलन हुआ है और जांच का निर्देश भी दिया था। रांची यूनिवर्सिटी के प्रोविजनल फंड में यूनिवर्सिटी द्वारा अपना अंश जमा नहीं करने के कारण राशि घटने की शिकायत भी की गयी थी। इसके बाद यूनिवर्सिटी ने मामले में जांच की जिम्मेदारी डॉ प्रसाद को सौंपी थी। मुंडा ने कहा था कि किसी भी हालत में एक तारीख को पेंशन आदि का भुगतान कर दिया जाये। परंतु अब भी पेंशनरों को पेंशन के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।

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