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33 फीसदी सीटों पर आरक्षण लेकर रहेंगे

बराबरी के हक की लड़ाई अपने घरों से शुरू करने के संकल्प के साथ भारतीय महिला फेडरशन (एनएफआईडब्ल्यू) का 18वां राष्ट्रीय महाधिवेशन पटना में शुरू हुआ। देश के 24 राज्यों से आयीं 703 महिला प्रतिनिधियों ने बुधवार को महाधिवेशन के उद्घाटन सत्र में सम्मिलत रूप से कहा कि पंचयतों से लेकर संसद तक कम से कम 33 फीसदी सीटों पर महिला आरक्षण लेकर ही वे दम लेंगी।ड्ढr ड्ढr आधुनिक संचार माध्यमों पर बाजारीकरण के दबाव में महिलाओं के हक के खिलाफ काम करने की बात कहते हुए वक्ताओं ने कहा कि उदारीकरण व वैश्वीकरण ने गैर-बरबरी का अन्तर और बढ़ा दिया है। धर्मनिरपेक्षता, कन्याभ्रूण हत्या, जमीनी विवाद, नरगा में महिलाओं का समुचित प्रतिनिधित्व, लैंगिक एवं आर्थिक समानता, राजनीतिक सशक्तीकरण और विश्व शांति के मूल उद्देश्यों की प्राप्ति में तीन दिनों तक चलने वाला यह महाधिवेशन सफल होगा। एनएफआईडब्ल्यू की राष्ट्रीय महामंत्री एनी राजा ने कहा कि महिला आयोगों में राजनीतिक नियुक्ित बन्द कर पब्लिक सर्विस कमीशन से योग्य पदधारकों का चुनाव करना होगा। उन्होंने महाधिवेशन में अगले तीन साल के संघर्ष की रणनीति बनाने की बात कही।ड्ढr ड्ढr अखिल भारतीय महिला जनवादी समिति (एडवा) की राष्ट्रीय महामंत्री सुधा सुन्दररमण ने कहा कि संयुक्त संघर्ष छेड़कर ही महिलाओं की समस्याओं का समाधान संभव है। सामाजिक कार्यकर्ता शबनम हाशमी ने कहा कि थाली में रखकर बराबरी के हक नहीं परोसे जाते। वाम ताकतें ही देश को फासीवाद से बचा सकतीं हैं। इस अवसर पर डाक्टर शांति राय, प्रभा शर्मा, डा. विजय लक्ष्मी, इबेनी देवी, मोहिन्दर सांभर,उर्मिला प्रसाद, आंध्रप्रदेश की विधायक विजिमोल, पी पद्मनाथ, संध्या महापात्र, कमला सदानन्दन, लता देवी, बिहार महिला समाज की अध्यक्ष सुशीला सहाय, उपाध्यक्ष उषा सहनी, महामंत्री सुभाषिणी शर्मा, एडवा की रामपरी समेत कई नेता एवं कार्यकर्ता उपस्थित थीं।

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