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नौकरी की आस में गंवा बैठे रोजी भी

अकेले भागलपुर में इनकी संख्या 400 है। पूर राज्य में करीब 30 हाार। ये वे लोग हैं जो पढ़े-लिखे, प्रशिक्षित भी हुए लेकिन रोगार नहीं मिला, सो बाहर चले गए। वहां किसी तरह से कमा खा रहे थे। इस बीच बिहार सरकार ने इनको उम्मीद दिलाई। यह उम्मीद लाखों प्रशिक्षित शिक्षकों की बहाली के रूप में आई थी। घर में नौकरी करने का मोह इन्हें यहां खींच लाया। ये सब एमए, एमएससी के बाद बीएड कर चुके हैं। पुराने पैटर्न से पढ़ाई के कारण ‘अंक-गणित’ इनके आड़े आ रहा है। सबको बीएड में 60 प्रतिशत से कम अंक मिले हैं। पहले चरण की बहाली में ये लोग शिक्षक नहीं बन पाए। लंबे संघर्ष बाद शासन ने इनलोगों को दूसर चरण में सत्रवार बहाली करने का अश्वासन किया। लेकिन इसे भी मूर्त रूप नहीं दिया जा सका। अब इन्हें अंदर ही अंदर एक चिंता सताने लगी है कि कहीं दूसर चरण में भी तो कम अंक आड़े नहीं आ जाएंगे। यह चिंता स्वाभाविक भी है, क्योंकि शिक्षक नियमावली में सत्रवार बहाली का कहीं उल्लेख नहीं है। यह लगभग 15 साल पहले की बात है। जब नौकरी नहीं मिली तो ये सब पंजाब, हरियाणा, मुंबई, दिल्ली, कोलकाता रोगार की तलाश में चले गए। धीर-धीर इनके जीवन की गाड़ी चलने लगी। इस बीच बिहार सरकार द्वारा लाखों शिक्षकों की बहाली की घोषणा से इनके चेहर खिल उठे। लेकिन इन्हें क्या पता था कि शासन की घोषणा से इनको कोई फायदा नहीं बल्कि नुकसान ही होगा। हुआ भी यही। घर में नौकरी करने के मोह में ये सब घर लौट आए। यहां इनको न माया मिली न राम। बीएड में कम अंक आने की वजह से ये शिक्षक नहीं बन पाए। लगी नौकरी भी हाथ से निकल गई। अब ये सब फिर से बेरोगार बन गए हैं। अभ्यर्थी अभय कुमार सिंह बताते हैं कि अब तो बच्चों की पढ़ाई भी बंद हो चुकी है। घर चलाना मुश्किल है। कौशल किशोर झा कहते हैं कि हमार अंक कम जरूर हैं लेकिन हम अक्षम नहीं है। बालकृष्ण झा, पवन, मधुकर रांन, मो. इंतखाव आलम, पुरुषोत्तम चौधरी आदि इसबार 80 से 0 जगहों पर आवेदन जमा कर चुके हैं। लेकिन जसे-ौसे मेधा सूची प्रकाशन का समय नजदीक आ रहा है इनका धर्य टूटता जा रहा है। क्या होगा पता नहीं। अब उम्र भी नहीं बची कि कहीं और नौकरी ही कर सकें। जब कुछ नहीं दिखा तो एक समय में शिक्षक संघ का बैनर भी ढोया। इस उम्मीद में कि शायद इनसे ही कुछ भला हो। लेकिन वहां भी निराशा ही हाथ लगी। अब इनलोगों का शिक्षक संगठनों से भी विश्वास उठने लगा है। बिहार बेरोगार प्रशिक्षित शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष नंदकिशोर ओझा कहते हैं कि सरकार हमार साथ छल कर रही है। 2006 में हाईकोर्ट में फैसला हमार पक्ष में था। सरकार ने वादा किया था कि दूसर चरण में शिक्षकों की बहाली सत्रवार की जाएगी जिससे सभी पूर्व प्रशिक्षित शिक्षक बन जाएंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

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