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बिहारी युवक ने बचाई चार की जान

‘तड़ातड़ चल रही गोलियों की आवाज सुनकर जब मैंने बाहर झांका तो हर ओर खून ही खून दिखाई दे रहा था। जबतक मैं स्थिति समझ कर अपने साथ काम करने वाली लड़की को लेकर वहां से भाग पाता, एक गोली मुझे छूते हुए उसके माथे पर जा लगी। मेर साथ ड्यूटी कर रहे चार अन्य दोस्तों को भी गोली लगी। हर ओर मची भगदड़ के बीच किसी तरह मैं साढ़े बारह बजे उन्हें बाहर निकाल पाया’। मुबंई में बुधवार की रात हुए बम विस्फोट में ओबेरॉय होटल में फंसे कुमार विवेक ने जब गुरुवार को ‘हिन्दुस्तान’ से बात की तो धमाकों की दहशत के साथ चार लोगों की जान बचाने का साहसिक कारनामा भी शामिल था जिसने पूर मुजफ्फरपुर को गौरवान्वित कर दिया। मोतीझील निवासी दीप्ति राय का 22 वर्षीय पुत्र धमाकों की गूंज के बीच उन चंद खुशनसीबों में रहा जिसे ईश्वरीय नेमत के रूप में जिन्दगी मिली। धमाकों के बाद जब इस मां को पुत्र के सकुशल होने की खबर मिली तो वे कहती हैं कि भगवान उसके साथ इतना अन्याय कर ही नहीं सकते। वर्ष 1में उसके पति वागेश्वर नारायण सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। 14 साल से उसने अकेले ही अपने दोनों पुत्रों को पाल-पोसकर बड़ा किया।ड्ढr 1 मई से ओबेरॉय होटल में जॉब कर रहे विवेक ने फोन पर कहा कि साढ़े दस बजे के करीब मैच देख रहे हमलोगों को तड़तड़ाहट सुन कर लगा कि यह इंडिया के जीतने पर है। नीचे आने पर देखा हर ओर गोली चल रही है। उसके दो दोस्तों को पैर और एक के कंधे में गोली लगी। हॉस्पीटल आने के बाद सुबह फोन पर विवेक ने मां को अपने ठीक होने की खबर दी।

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