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सुरक्षा पर खतरा, परिवहन विभाग के होश उड़े

र्जी नाम-पता बता कर निबंधित वाहन राज्य में सुरक्षा पर खतरा बन गये हैं। वाहन मालिकों के इस खेल ने परिवहन विभाग के होश ठिकाने लगा दिये हैं। फिलहाल ऐसे 300 वाहनों की सूची बनी है जिनके मालिकों का नाम-पता जाली है। आतंकी हमलों के दौर में यह वाहन सुरक्षा पर खतरा तो है ही, इससे सरकारी खजाने को भी लाखों रुपये का चूना भी लगा है। विभाग ने अपने सभी डीटीओ को फर्जी नाम-पते पर रजिस्टर्ड गाड़ियों की सूची देकर उन्हें दबोचने का फरमान जारी कर दिया है।ड्ढr ड्ढr विभागीय सूत्रों के अनुसार सूची में शामिल अधिकतर वाहन पटना, मुजफ्फरपुर, नालन्दा, बेतिया, दरभंगा और छपरा जिला परिवहन कार्यालयों से निबंधित हैं। इसके अलावा कई गाड़ियां दिल्ली, हरियाणा, आंध्रप्रदेश और पश्चिम बंगाल की भी हैं जिनका बाद में बिहार के जिला परिवहन कार्यालयों में एपी कराया गया है। कुछ समय पहले जब राज्य में टैक्स डिफाल्टर वाहनों की धरपकड़ की मुहिम शुरू हुई तो वाहन मालिकों की इस करतूत का पर्दाफाश हुआ। सूत्रों के अनुसार रजिस्ट्रशन करने से पहले जिला परिवहन कार्यालय वाहन मालिक से डीलर के सेल लेटर पर दर्ज पते का प्रमाण लेता है। ऐसे में संभव है कि जालसाज मालिक ने वाहन खरीदते समय भी डीलर के यहां अपना असली पता-ठिकाना छुपाया हो। अब उसका मकसद सिर्फ सरकार को चूना लगाना था या कुछ और। यह तो वाहनों के पकड़ाने के बाद ही पता लग सकेगा।ड्ढr विभागीय सूत्रों के अनुसार सूची में शामिल कुछ वाहन तो 10 के दशक के भी हैं जिनके मालिकों की ठीक-ठीक जानकारी मिलना संभव नहीं। ऐसे में वाहनों को सड़क पर ही पकड़ने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। आमतौर पर ऐसे वाहनों की धरपकड़ करने की बजाय जिला परिवहन पदाधिकारी सर्टिफिकेट केस करके मामले से अपना पिंड छुड़ा लेते हैं।

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