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CBI को लोकपाल के दायरे से बाहर रखने का फैसला

CBI को लोकपाल के दायरे से बाहर रखने का फैसला

समझा जाता है कि सरकार ने अन्ना हजारे की मांगों को नहीं मानते हुए सीबीआई को प्रस्तावित लोकपाल के दायरे से बाहर रखने का फैसला किया है। सरकार के कुछ वरिष्ठ मंत्रियों के बीच हुई चर्चा में यह विचार सामने आया है। ये मंत्री खुद वकील हैं और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से इस बाबत सिफारिश कर चुके हैं।

लोकपाल विधेयक के कैबिनेट के मसौदे को कार्मिक विभाग के अधिकारियों ने कल रात अंतिम रूप दिया। मसौदे के नोट को प्रधानमंत्री को भेजा गया, जिन्होंने मंगलवार की रात होने वाली कैबिनेट की विशेष बैठक में रखने के लिए मसौदे को मंजूरी दे दी है।

गृह मंत्री पी चिदंबरम, कानून मंत्री सलमान खुर्शीद और संचार मंत्री कपिल सिब्बल ने सोमवार को लोकपाल में संशोधनों पर बातचीत की थी और बदलावों को अंतिम रूप दिया। बातचीत में कार्मिक राज्य मंत्री वी नारायणसामी भी मौजूद रहे।

सूत्रों के अनुसार लोकपाल का सीबीआई के उपर कोई नियंत्रण नहीं रहेगा, जबकि हजारे और उनकी टीम पिछले कई महीने से सीबीआई को लोकपाल के दायरे में लाने की पुरजोर तरीके से मांग उठाती आ रही है। सूत्रों ने यह भी कहा कि लोकपाल के तहत सीबीआई का अलग से कोई अभियोजन निदेशालय भी नहीं होगा।

मौजूदा लोकपाल विधेयक में कुछ अन्य संशोधन भी प्रस्तावित हैं जिनमें सीबीआई निदेशक को चुनने वाली समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष की नेता और भारत के प्रधान न्यायाधीश का शामिल होने का प्रावधान भी है। पहले लोकसभा अध्यक्ष को समिति में रखने की योजना थी, लेकिन अब उनकी जगह भारत के प्रधान न्यायाधीश का नाम रखा गया है।

विधेयक में लोकपाल पर किसी आरोप की स्थिति में महाभियोग का प्रस्ताव भी है जिसके लिए 100 सांसदों को प्रस्ताव रखना होगा। सूत्रों ने कहा कि लोकपाल स्वयं कोई जांच शुरू नहीं कर सकता और केवल उसे की गयी शिकायतों पर कार्रवाई कर सकता है।

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