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'गीता' पर प्रतिबंध बेहूदा हरकतः कृष्णा

'गीता' पर प्रतिबंध बेहूदा हरकतः कृष्णा

रूस में कुछ तत्वों द्वारा भगवद्गीता पर प्रतिबंध लगाए जाने के प्रयासों को सरकार ने पूर्णत: बेहूदा हरकत बताते हुए विश्वास जताया कि रूस की सरकार इस मामले के समाधान की दिशा में उचित कदम उठाएगी।

भगवद्गीता को उग्रवादी साहित्य बता कर रूस के साइबेरिया की एक अदालत में इसे प्रतिबंधित करने संबंधी मामले की संसद में सोमवार को कड़ी भर्त्सना के बाद विदेश मामलों के मंत्री एसएम कृष्णा ने लोकसभा में दिए बयान में कहा कि सरकार ने इस मामले को बहुत गंभीरता से लिया है और रूस सरकार के साथ इसे उच्च स्तर पर उठाया गया है।

कष्णा ने कहा कि रूस की स्थानीय अदालत में भगवद्गीता के बारे में की गयी यह शिकायत किसी अज्ञानी या भटके हुए निहित स्वार्थों से प्रेरित व्यक्तियों द्वारा किया गया काम लगता होता है। उन्होंने कहा, हालांकि यह शिकायत पूरी तरह निरर्थक है, फिर भी हमने इस मामले को गंभीरता से लिया है और भारतीय दूतावास इस कानूनी मामले का गहरी नजर रखे हुए है।

इस मुद्दे पर सदस्यों की भावना से सरकार को पूरी तरह संबद्ध करते हुए विदेश मंत्री ने कहा, हमें विश्वास है कि हमारे रूसी मित्र, जो हमारी सभ्यता के मूल्यों एवं सांस्कृतिक संवेदनशीलता को समक्षते हैं, इस मसले का उपयुक्त समाधान कर लेंगे।

सरकार के जवाब पर संतोष जताते हुए सदस्यों ने मेजें थपथपा कर उसका स्वागत किया। मंत्री के बयान के बाद विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने सुझाव दिया कि भगवद्गीता को राष्ट्रीय पुस्तक घोषित कर दिया जाए जिससे किसी भी देश को इसका अपमान करने की जुर्रत नहीं हो।

कृष्णा ने कहा कि गीता किसी अज्ञानी अथवा भटके हुए व्यक्ति द्वारा किए जाने वाले घटिया दुष्प्रचार अथवा हमलों से काफी ऊपर है।

इससे पहले लोकसभा में शून्यकाल के दौरान कई सदस्यों ने इस पर घोर आपत्ति जताई और शोर-शराबे में कुछ देर के लिए कार्यवाही बाधित रही। खास तौर पर लालू प्रसाद, मुलायम, मुरली मनोहर जोशी काफी उत्तेजित दिखे। लालू प्रसाद बीच-बीच में बोलो कृष्ण भगवान की जय का उद्घोष करते रहे और सदस्यों ने भी इसमें एक स्वर में उनका साथ दिया। बाद में मुलायम सिंह ने गीता के प्रचार-प्रसार पर ध्यान देने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि गांधी जी गीता से ही पथ प्रदर्शन लिया करते थे। लिहाजा प्राइमरी स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय तक गीता की पढ़ाई होनी चाहिए।

उनके बाद लालू प्रसाद ने प्रधानमंत्री की हाल की मॉस्को यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि पता नहीं उन्हें इसकी जानकारी मिली थी या नहीं, लेकिन सरकार को अब तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। शरद यादव, प्रसन्न पाटसनी जैसे दूसरे कई सदस्यों ने भी सरकार से आग्रह किया कि समय रहते रूस सरकार से बात करें और सुनिश्चित करें कि गीता पर आंच न आए। इस्कान के एक गुरु स्वामी प्रभु पाद की लिखी हुई गीता का रूसी भाषा में अनुवाद किया गया है। इसी के आधार पर याचिकाकर्ता ने गीता पर भेदभाव फैलाने का आरोप कोर्ट में लगाया है और इस पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। जल्द यह मामला सुनवाई के लिए कोर्ट में आएगा।

सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने भी गंभीर प्रयास का संकेत देते हुए कहा कि मंगलवार को विदेश मंत्री एसएम कृष्णा इस मामले में विस्तार से जानकारी देंगे।

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