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रूस में गीता पर प्रतिबंध 28 दिसंबर तक टला

रूस में गीता पर प्रतिबंध 28 दिसंबर तक टला

रूस की एक अदालत ने सोमवार को हिन्दू धर्मग्रंथ भगवद गीता पर प्रतिबंध लगाने की मांग पर अपना फैसला 28 दिसंबर तक के लिए टाल दिया। क्रिस्टियन आर्थोडोक्स चर्च से जुड़े एक संगठन ने गीता को चरमपंथी करार दिया है।

साइबेरियाई शहर तोमस्क की एक अदालत द्वारा फैसला टालने के बाद इस्कॉन के साधू प्रिय दास ने कहा कि फैसला 28 दिसंबर तक के लिए टाल दिया गया है, क्योंकि इस्कॉन की स्थानीय इकाई के वकील ने अदालत से रूसी लोकपाल और रूस में इंडोलाजी के मुख्य केन्द्र मास्को तथा सेंट पीटर्सबर्ग के विशेषज्ञों से राय लेने की मांग की।

इससे पहले रूस के लोकपाल व्लादिमीर लुकिन ने अपना बयान जारी करके घोषणा की थी कि इस्कॉन के संस्थापक ए सी भक्तिवेदांता स्वामी द्वारा लिखित भगवद गीता एज इट इज विश्व भर में प्रतिष्ठित पुस्तक है और रूस में इस पर प्रतिबंध लगाने की मांग अस्वीकार्य है।

उधर, रूस में रह रहे भारत, बांग्लादेश, मारिशिस, नेपाल और अन्य देशों के हिन्दुओं ने आपातकालीन बैठक में अपने हितों की रक्षा के लिए हिन्दू काउंसिल आफ रूस बनाया।

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