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मैदान से बाहर ही विवादों से जूझती रही भारतीय हाकी

मैदान से बाहर ही विवादों से जूझती रही भारतीय हाकी

बरस बदल गया लेकिन नहीं बदली तो भारतीय हाकी की नियति। मैदान पर प्रदर्शन से अधिक मैदान के बाहर विवाद ही 2011 में सुर्खियों में रहे। मामूली पुरस्कार देकर खिलाड़ियों का अपमान किया गया तो क्लब बनाम देश विवाद विश्व सीरीज हाकी के स्थगित होने का कारण बना। हाकी में सत्ता का संघर्ष खत्म करने के लिए खेल मंत्रालय के सारे प्रयास नाकाम रहे।

पिछले साल राष्ट्रमंडल खेलों में रजत और एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय टीम ने इस साल खिताब के नाम पर सिर्फ सितंबर में इपोह में पहली एशियाई चैम्पियंस ट्राफी जीती। इसके बाद खिलाड़ियों को महज 25000 रुपये पुरस्कार के तौर पर देने का ऐलान करके हाकी इंडिया ने एक नए विवाद को जन्म दिया।
 
खिलाड़ियों की नाराजगी के बाद कई राज्य सरकारों और खेल मंत्रालय ने नकद पुरस्कारों का ऐलान करने में देर नहीं की। खिलाड़ियों की माली हालत सुधारने का दावा करते हुए निम्बस स्पोर्ट्स और केपीएस गिल की अगुवाई वाले भारतीय हाकी महासंघ ने आईपीएल की तर्ज पर दो करोड़ डालर की विश्व सीरीज हाकी शुरू करने की घोषणा की। इसमें फ्रेंचाइजी आधारित आठ टीमों में दुनिया भर के 200 खिलाड़ियों के साथ करार किए गए लेकिन इससे पैदा हुआ क्लब बनाम देश विवाद।

फरवरी में होने वाले ओलंपिक क्वालीफायर का हवाला देकर हाकी इंडिया ने अपने खिलाड़ियों को राष्ट्रीय शिविर में बुलाया तो अंतरराष्ट्रीय हाकी महासंघ ने इसे अनधिकत लीग करार देकर इसमें भाग लेने वाले खिलाड़ियों को अपने टूर्नामेंटों से प्रतिबंधित करने की धमकी दे डाली।

आखिरकार 27 दिसंबर से 22 जनवरी तक होने वाली यह लीग अब 29 फरवरी 2012 से एक अप्रैल तक होगी। भारतीय हाकी महासंघ और हाकी इंडिया के बीच जारी सत्ता की लड़ाई के कारण भारत को चैम्पियंस ट्राफी की मेजबानी गंवानी पड़ी। एफआईएच ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए मेजबानी न्यूजीलैंड को सौंप दी और शीर्ष आठ टीमों में नहीं होने के कारण भारत इसमें खेल भी नहीं सका। भारत ने किसी तरह ओलंपिक क्वालीफायर की मेजबानी बचा ली।
 
चैम्पियंस ट्राफी से बाहर होने के बाद भारत ने दक्षिण अफ्रीका में चैम्पियंस चैलेंज वन टूर्नामेंट खेला जिसमें फाइनल में उसे बेल्जियम जैसी कमजोर टीम ने हराकर तैयारियों की कलई खोल दी। खेलमंत्री अजय माकन ने आईएचएफ और हाकी इंडिया के विलय की तमाम कोशिशें की लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात। जुलाई में मंत्रालय की पहल पर दोनों पक्ष मिलकर काम करने और एक अस्थायी कार्यकारी समिति के गठन को तैयार हो गए लेकिन विश्व सीरीज हाकी और पदाधिकारियों के रोटेशन के मसले पर दोनों की पटरी नहीं बैठी और मजबूरी में बना यह रिश्ता टूट गया।

भारतीय ओलंपिक संघ ने भी दोनों पक्षों के बीच सुलह सफाई की कोशिशें की जो नाकाम रहीं। एफआईएच ने भारत में राष्ट्रीय खेल महासंघ के रूप में हाकी इंडिया की मान्यता बरकरार रखी। अब हाकी की इस लड़ाई से मंत्रालय और आईओए ने कन्नी काट ली है लिहाजा फैसला अदालत में होगा।

विश्व सीरीज हाकी के कार्यक्रम में भाग लेने के लिए राष्ट्रीय शिविर छोड़ने वाले ड्रैग फ्लिकर संदीप सिंह और मिडफील्डर सरदारा सिंह को प्रतिबंध झेलना पड़ा जो दोनों के माफी मांगने के बाद हाकी इंडिया ने वापिस ले लिया। इस साल आस्ट्रेलिया के माइकल नोब्स के रूप में भारतीय हाकी को नया कोच मिला।

पिछले साल स्पेन के जोस ब्रासा के जाने के बाद हरेंद्र सिंह को अजलन शाह कप में टीम की कमान सौंपी गई थी लेकिन पांच बार का चैम्पियन भारत टूर्नामेंट में शर्मनाक छठे स्थान पर रहा। इसके बाद हरेंद्र की छुट्टी हुई और नए कोच की तलाश की गई।

नोब्स ने हालैंड के रोलैंट ओल्टमेंस जैसे धुरंधर कोच को पछाड़कर यह पद हासिल किया। उनके साथ आस्ट्रेलिया से आए डेविड जान भारत के नए ट्रेनर बने। आस्ट्रेलिया में रिक चार्ल्सवर्थ की पहल पर हुई हाकी नाइंस सुपर सीरीज ने खेल के प्रारूप में नई क्रांति का सूत्रपात किया। पुरुष वर्ग में भारत, पाकिस्तान, न्यूजीलैंड और आस्ट्रेलिया खेले तो महिला वर्ग में भारत, मलेशिया और आस्ट्रेलिया ने भाग लिया।

प्रति टीम नौ खिलाड़ियों के इस टूर्नामेंट में आस्ट्रेलिया ने न्यूजीलैंड को हराकर खिताब जीता जबकि भारतीय महिला टीम उपविजेता रही। उसे फाइनल में आस्ट्रेलिया ने 4-1 से हराया। हाकी के इस टी20 टूर्नामेंट में भारतीय पुरुष टीम तीन ड्रा और तीन हार के साथ चार टीमों में चौथे स्थान पर रही।
 
इसके बाद खेली गई त्रिकोणीय सीरीज में भारत फाइनल तक नहीं पहुंच सका। पाकिस्तान ने फाइनल में आस्ट्रेलिया को हराया। भारत को आस्ट्रेलिया के हाथों 8-3 और 5-0 से पराजय झेलनी पड़ी जबकि पाकिस्तान से उसके दोनों मैच ड्रा रहे।

भारतीय महिला हाकी टीम सुपर सीरीज में उपविजेता रही जबकि आस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज में उसे 2-1 से पराजय झेलनी पड़ी। इससे पहले सितंबर में हुई एशियाई चैम्पियंस ट्राफी में सभी चार मैच हारकर चौथे स्थान पर रही। इससे पहले आयरलैंड के डबलिन में जून में खेले गए चार देशों के चैम्पियंस चैलेंज में भारतीय टीम क्वार्टर फाइनल में जापान से एक गोल से हार गई।
 
भारतीय जूनियर पुरुष टीम मलेशिया में हुए छह देशों के सुल्तान जोहोर बाहरू कप में चौथे स्थान पर रही। कांस्य पदक के मुकाबले में उसे दक्षिण कोरिया ने 4-3 से हराया। वहीं महिला अंडर 18 टीम बैंकाक में हुए दस देशों के एशिया कप में तीसरे स्थान पर रही।
 
इसके अलावा सरकार द्वारा भारत रत्न पुरस्कार की श्रेणी में खेलों को शामिल किए जाने से हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने की मांग भी साल भर जोर पकड़ती रही। अगले साल ओलंपिक पर फोकस रहेगा लिहाजा भारतीय हाकी के सामने सबसे बड़ी चुनौती फरवरी में दिल्ली में होने वाले क्वालीफायर जीतकर 2008 की त्रासदी के दोहराव से बचना होगा। पिछले 80 बरस में पहली बार भारत बीजिंग ओलंपिक 2008 के लिए क्वालीफाई करने में नाकाम रहा था और इसकी पुनरावृत्ति होती है तो भारतीय हाकी के पुनरोद्धार के रास्ते बंद हो जाएंगे। इसका अहसास खिलाड़ियों को भी है और हाकी प्रशासन को भी।
 

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