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दिल्ली की सर्दी को मिस करते हैं अमिताभ

दिल्ली की सर्दी को मिस करते हैं अमिताभ

हिंदी फिल्म जगत के महानायक अमिताभ बच्चान के दिलोदिमाग पर आज भी राजधानी दिल्ली की सर्दी, चांदनी चौक की परांठे वाली गली और बंगाली मार्केट की चाट की यादें तरोताजा हैं।
     
माया नगरी मुंबई को अपनी कर्मस्थली बना चुके ,लेकिन दिल्ली और इलाहाबाद की यादों में डूबे अमिताभ ने अपने ब्लॉग में लिखा कि वह आज भी दिल्ली की सर्दी और कालेज के दिनों को बहुत मिस करते हैं। उन्होंने कहा, मैं सुबह सुबह उठकर विश्वविद्यालय जाने के लिये अपने साउथ एवेन्यू स्थित आवास से तीन मूर्ति जाकर बस पकड़ता था। इलाहाबाद जैसे एक छोटे से शहर से राजधानी आने पर यह आश्चर्य में डाल देने वाली चीजें दिखाई देती थी और हरेक चीज काफी बड़ी और खूबसूरत लगती थी।
     
उन्होंने कहा, साउथ एवेन्यू से होकर पंडित जी (जवाहर लाल नेहरू) अपने कार्यालय जाते थे। कालेज के दिन तो बेहद मस्ती भरे थे। हम अपने कालेज से लगे अन्य कालेजों की कैंटीन में जाते थे और लजीज खाने का मजा लेते थे और टेबल टेनिस खेलते थे। बिग बी ने कहा कि जब मैं मां के साथ सैर पर बंगाली मार्केट जाता था तो वहां मिलने वाली दुनिया की सबसे स्वादिष्ट चाट का आनंद उठाता था। कालेज के दिनों में क्लास छोड़कर तफरीह करने वाली हमारी गैंग के साथ मैं चांदनी चौक की परांठे वाली गली जाता था। ठंड के दिनों में हमारे घर के पास हरसिंगार के फूलों की भीनी भीनी खूशबू रहती थी जो मन मोह लेती थी।
     
बिग बी ने कहा कि सर्दियों के दिनों में हम रात में परिवार और मित्रों के साथ कंबल ओढ़कर अलाव तापते थे। इसके बाद चिलचिलाती गर्मियां आ जाती थीं। असहनीय गर्मी और लू (गर्म हवा) हमें घर से बाहर निकलने से रोकती थी। इसके बाद आती थी बारिश की बूंदे जो हमें गर्मी से राहत दिलाती थीं।
     
अमिताभ ने कहा कि वह रोमांच, वह सादगी, वह विश्वास अब सब चला गया। हम रात में अपने घर के दरवाजे और खिड़कियां खोलकर सोते थे। घर के दरवाजे कभी बंद नहीं किये जाते थे। कभी कभी तो हम घर के बाहर या छत पर सोते थे। कोई सुरक्षागार्ड नहीं बस एक बेफिक्र जीवन।
     
बिग बी ने कहा कि और आज जब मैं यह ब्लॉग लिख रहा हूं। सभी दरवाजों की दो बार जांच की गई है, सभी खिड़कियां बंद हैं। ताले बंद हैं और सुरक्षाकर्मी मुस्तैद हैं। फोन और अलार्म बगल में पड़े हैं। बाहर सड़क पर अत्यधिक यातायात और शोर है। उन्होंने कहा कि इलाहाबाद में जब मैं रात में सोता था तो केवल एक ही आवाज आती थी, वह थी सियार की। लोग कहते थे कि अरे वहां पर सियार बोलता है। इसके अलावा जागते रहो भी और उसके डंडे की आवाज सुनाई देती थी।

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