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विकास दर पर वैश्विक संकट का असर शुरू

वित्तीय संकट ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के दौरान देश की आर्थिक विकास दर असर दिखाना शुरू कर दिया है। इस अवधि के दौरान जीडीपी वृद्धि दर पिछले साल की इसी तिमाही के दौरानीसदी के मुकाबले 7.6 फीसदी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों की माने तो वैश्विक संकट का प्रतिकूल असर तीसरी तिमाही में अधिक दिखाई देगा। वित्त मंत्री पी.चिदंबरम ने वैश्विक मंदी को देखते हुये पहली छमाही के दौरान आर्थिक विकास दर 7.8 प्रश को संतोषजनक माना है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि चालू वित्त वर्ष के दौरान आर्थिक विकास दर 7 से 8 फीसदी के बीच रहने की उम्मीद है। मैन्युफैक्चरिंग और बिजली क्षेत्र अभी समस्या बने हुये हैं। हम होटल, वित्त पोषण, टेक्सटाइल, रत्न एवं आभूषण और रीयल एस्टेट क्षेत्रों पर विशेष गौर करंगे। पहली छमाही के दौरान मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की विकास दर 10.1 फीसदी से घटकर लगभग आधी यानी 5.3 फीसदी रह गई है। बिजली, गैस और जलापूर्ति क्षेत्र की विकास दर 7.4 फीसदी के मुकाबले 3.1 फीसदी रही है। इस अवधि में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 4.5 फीसदी से कम होकर 2.ीसदी पर आ गई है। कन्स्ट्रक्शन क्षेत्र की विकास दरीसदी से बढ़कर 10.5 फीसदी पर पहुंच गई है। व्यापार, होटल और ट्रांसपोर्ट सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर 12.1 फीसदी से घटकर 11 फीसदी और वित्तीय सेवाओं की वृद्धि दर 12.5 फीसदी से कम होकरीसदी रह गई है। दूसरी तिमाही के दौरान कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 4.7 फीसदी के मुकाबले 2.7 फीसदी रही है। मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की वृद्धि दरीसदी से घटकर पांच फीसदी रह गई है। वहीं बिजली व संबंधित क्षेत्रों की वृद्धि दर 6.ीसदी से कम होकर 3.6 फीसदी पर रह गई है।

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