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व्यवहारिक मूल्य पर आयात अनुबंध पूरा करेगा इफ्को

डॉलर के मुकाबले रुपये में आई गिरावट से उर्वरक आयात काफी महंगा होने पर गौर करते हुये सहकारी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी इफ्को ने कहा है कि वह आयात मूल्य व्यवहारिक होने पर ही अपने सभी आयात अनुबंधों को पूरा करेगा।
   
उर्वरकों का आयात महंगा होने के मद्देनजर इफ्को ने वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं से उर्वरक के दाम कम करने का आग्रह किया था। महंगे आयात से सरकार को उर्वरक पर सब्सिडी भी ज्यादा देनी होगी। उवर्रक राज्यमंत्री श्रीकांत जेना ने कहा है कि इफ्को अपने आपूर्तिकर्ताओं के साथ अनुबंध संबंधी दायित्वों को पूरा करने का हर संभव प्रयास करेगा। 
   
मंत्री ने कहा कि रुपये में अवमूल्यन के कारण इफ्को ने अपने पारंपरिक वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं से उवर्रक उत्पादों की कीमतों में कटौती का अनुरोध किया है। कंपनी ने डाय अमोनियम फास्फेट (डीएपी) की आपूर्ति में 50 डॉलर प्रति टन की कटौती तथा एनपीके जैसे मिश्रित उवर्रक की कीमत में 45 डालर प्रति टन की कमी करने का अनुरोध किया था।
   
फास्फेटिक और पोटाशियम उवर्रकों की अंतरराष्ट्रीय कीमत में हाल में काफी तेजी आई है। वैश्विक कीमतें बढने और रुपया-डॉलर दर में पर्याप्त तेजी के कारण फास्फेटिक और पोटाशियम उवर्रकों की घरेलू अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) लगभग दोगुने हो गये हैं। अप्रैल 2010 के बाद से फास्फेटिक और पोटाशियम उवर्रकों कीमतों का निर्धारण का काम विनिर्माताओं के उपर छोड़ दिया गया है। इन उवर्रकों की वैश्विक कीमतों में कोई वृद्धि या गिरावट का अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) पर सीधा असर होता है।
   
रसायन उवर्रकों को प्रतिबंधित करने के बारे में सरकार का कहना है कि रासायनिक उवर्रकों को चलन से हटाने का कोई प्रस्ताव नहीं है क्योंकि जैविक उवर्रकों की उपलब्धता पौधों के पोषण को पूरा करने के लिए पर्याप्त मात्रा में नहीं है। मौजूदा समय में जैविक उवर्रक मात्र 25 प्रतिशत के बराबर ही रासायनिक उवर्रकों के भरपाई कर सकता है। जैविक खेती को प्रोत्साहित करने की एक परियोजना वर्ष 2004 से शुरू हुई है।

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