DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

स्वामी ने दी गवाही, 7 जनवरी को फिर होगी सुनवाई

स्वामी ने दी गवाही, 7 जनवरी को फिर होगी सुनवाई

2जी घोटाले में मौजूदा गृहमंत्री पी चिदंबरम को भी घेरने के लिए जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रहमण्यम स्वामी ने शनिवार को पटियाला हाउस कोर्ट में गवाही दी। अब इस मामले में 7 जनवरी को सुनवाई होगी। स्वामी की दलीलों के बाद ही कोर्ट तय करेगा कि चिदंबरम को इस मामले में आरोपी बनाया जाए या नहीं।

स्वामी ने सीबीआई से प्राप्त दस्तावेजों को कोर्ट में पेश कर यह साबित करने की कोशिश की है कि चिदंबरम के इशारों पर ही 2जी स्पैक्ट्रम घोटाला हुआ। स्वामी जिन दस्तावेजों को कोर्ट में पेश कर चिदंबरम को फंसाने की मांग कर रहे हैं उन्हीं दस्तावेजों को केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने चिदंबरम के बचाव में पेश किया था। चिदंबरम के बचाव में सिब्बल ने कहा था कि पहले आओ पहले पाओ के आधार पर स्पैक्ट्रम आवंटन करना सरकार की ही नीति थी। सिब्बल ने चिदंबरम के बचाव में कहा था कि एनडीए और विपक्ष पी चिदंबरम को फंसाने की साजिश रच रहा है। चिदंबरम यूपीए के अहम मंत्री हैं और उन्होंने बिना किसी भेदभाव के पूरी इमानदारी से अपना काम किया था।

सुब्रहमण्यम स्वामी ने कोर्ट में शिकायत दायर कर गृहमंत्री पी चिदंबरम को भी 2जी घोटाले में आरोपी बनाने की मांग की है। स्वामी ने यह भी मांग की है कि सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी और टेलीकॉम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी को भी इस मामले में गवाही देने के लिए कोर्ट में बुलाया जाए। 

एक के बाद एक मुश्किलें चिदंबरम के दरवाजे पर दस्तक दे रही हैं। हालांकि सरकार उनके बचाव में उतर आई है। कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल के मुताबिक, 'कोर्ट से साबित हो तब ही भ्रष्‍टाचार होता है।' श्रीप्रकाश जायसवाल चाहे जितनी दलीलें दें, लेकिन चिदंबरम की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। चिदंबरम अपने पुराने मुवक्किल को फायदा पहुंचाने का आरोप भी झेल रहे हैं।

स्‍वामी वित्त मंत्रालय में ज्वाइंट सेक्रेट्री रहीं सिंधु श्री खुल्लर और सीबीआई के मौजूदा ज्वाइंट डायरेक्टर एच सी अवस्थी को बतौर गवाह कोर्ट में पेश करना चाहते हैं। अब अगर अदालत इन दोनों को बतौर गवाह बुलाती है तो चिदंबरम की मुश्किलें बढ़ जाएंगी।

गौरतलब है कि 2जी स्पेक्ट्रम की जब नीलामी हो रही थी तब पी चिदंबरम वित्त मंत्री थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने पहले आओ, पहले पाओ नीति के आधार पर स्पेक्ट्रम नीलामी को बतौर वित्त मंत्री मंजूरी दी थी। उन्होंने पहले 2001 के रेट के आधार पर 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन का विरोध किया था, लेकिन जब तत्कालीन संचार मंत्री ए राजा ने 2007 के रेट पर आवंटन कर दिया तो चिदंबरम ने उसे मंजूरी दे दी।

सुब्रहमण्यम स्वामी 2जी मामले में चिदंबरम को सह-आरोपी बनाना चाहते हैं। उनकी दलील हैं कि चिदंबरम उतने ही बड़े आरोपी हैं जितने बड़े पूर्व संचार मंत्री ए राजा। उनका कहना है कि राजा ने जो कुछ किया वो चिदंबरम की इजाजत के बाद किया। स्‍वामी के मुताबिक चिदंबरम ने उन कंपनियों को भी स्पेक्ट्रम आवंटन देने की इजाजत दी जिन पर सरकार ने बैन लगाया हुआ था। यही नहीं चिदंबरम और राजा ने मिलकर स्पेक्ट्रम की कीमतें तय की। इस सिलसिले में दोनों के बीच 29 मई 2008 और 12 जून 2008 को बैठकें हुई थीं।

स्वामी के मुताबिक सिंधु श्री खुल्लर का बयान इसलिए जरूरी है क्योंकि वो चिदंबरम और राजा के बीच 2जी पर हुई बैठक के दौरान मौजूद थीं और उन्हें बातीचीत का पूरा ब्यौरा पता है। वहीं, एच सी अवस्थी की गवाही से स्वामी यह जानना चाहते हैं कि जब सीबीआई के पास चिदंबरम और राजा की मीटिंग से जुड़ी फाइल थी तो उन्होंने चिदंबरम की भूमिका की जांच क्यों नहीं की।
 
सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई ने यह कहा था कि उसे कुछ गड़बड़ियों का पता चला था, लेकिन चिदंबरम के शामिल होने की बात इससे साबित नहीं होती।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:स्वामी ने दी गवाही, 7 जनवरी को फिर होगी सुनवाई