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जो पास है, वो खास है

जो पास है, वो खास है

स्टार इंडिया समूह के चैनलों को नयी बुलंदियों पर पहुंचाने वाले कंपनी के सीईओ उदयशंकर समय की नब्ज पकड़ने वाले व्यक्ति के रूप में जाने जाते हैं। प्रस्तुत है प्रवीण प्रभाकर से उनकी बातचीत

पिछले दस वर्षों में समाज और मनोरंजन जगत में काफी बदलाव हुए हैं। ऐसे में आपकी नजर में मनोरंजन के क्या मायने हैं?
मनोरंजन की दो भूमिकाएं होती हैं। एक तो लोगों का मनोरंजन करना और
दूसरा समाज में जो कुछ हो रहा है या होने वाला है, उसे परिलक्षित करना।
यह इतना आसान काम नहीं है। खासकर जब आप मुंबई के वसरेवा में रह रहे हैं और गोरखपुर, हिसार और भोजपुर के मध्यवर्गीय परिवार पर कोई कहानी  लिखते हैं, तो आपकी कहानी सच्चाई से दूर रहेगी। तब आप कोई फूहड़-सी कहानी ही लिखेंगे।

आपने देखा होगा कि कुछ वक्त पहले स्टार प्लस की लोकप्रियता घटने लगी थी, क्योंकि तब स्टार प्लस दस साल पहले के समाज को दिखा रहा था और हमारा समाज तेजी से बदल रहा है। तब हमने स्टार प्लस के लोगो बदले। नए कार्यक्रम लेकर आए और फिर सब ठीक हो गया। हालांकि एंटरटेनमेंट टेलीविजन के पहले दस साल काफी अच्छे रहे हैं। मनोरंजन की जो एकरूपता दूरदर्शन के जमाने में थी, उसे तोड़ने का काम किया है। अब लोगों की चाहत, उम्मीदों और सपने को बढ़िया तरीके से प्रस्तुत करने का दौर आया है।

आप कोई नया चैनल लेकर आ रहे हैं?
जी हां, हम लोग लाइफ ओके चैनल ला रहे हैं। 18 दिसंबर को यह चैनल लॉन्च होगा। पहली बार एंटरटेनमेंट टेलीविजन इंडस्ट्री में कोई चैनल एक फिलॉसफी के साथ आ रहा है। दरअसल, आज के दौर में भागम-भाग बहुत है। लोग लगातार अपनी महात्वाकांक्षा के पीछे भाग रहे हैं। लेकिन यह पूरी सच्चाई नहीं है। कुछ अपनी जिंदगी से खुश हैं। बात यहां अमीरी-गरीबी की नहीं है। बात यहां संतोष की है। इसलिए हमारा स्लोगन है- जो पास है, वो खास है।

इस चैनल के प्रोग्राम किस तरह के होंगे?
एक धारावाहिक का नाम है-सौभाग्यवती भव:। यह कहानी शादी की अहमियत पर है। इसी तरह हम सच का सामना को इस चैनल पर ला रहे हैं। इसकी खासियत यह होगी कि इसमें वे लोग हिस्सा लेंगे, जो भ्रष्टाचार के शिकार हुए हैं या भ्रष्टाचार के खिलाफ हैं। ‘तुम देना साथ मेरा’ धारावाहिक एक ऐसे परिवार की दंपती की कहानी है, जो रोमांस और एम्बिशन के बीच तालमेल बिठा रहे हैं। ‘मेरी मां’ और ‘देवों के देव महादेव’ भी हमारे इस चैनल के कुछ खास कार्यक्रम हैं। ‘मेरी मां’ में एक छोटी बच्ची की कहानी है, जो अपनी मां को ढूढ़ रही है। ‘देवों के देव महादेव’ को हम 18 दिसंबर को ही लॉन्च करेंगे। यह भगवान शिव की जिंदगी की कहानी है।

स्टार वन की तुलना में यह चैनल कितना भिन्न होगा?
एकदम अलग है। मैं तो यह कहूंगा कि स्टार वन से इसका कोई रिश्ता नहीं है। इसमें एकदम नई सोच है। स्टार वन चैनल उन लोगों के लिए था, जिन्हें स्टार प्लस के कार्यक्रम देसी लगते थे, इसलिए एक अप मार्केट चैनल लाया गया। लेकिन लाइफ ओके चैनल सबके लिए है। इसमें ज्यादा क्रिएटिव ऑप्शन होंगे। सबलोगों के पोर्टफोलियो का खयाल रखा गया है। कोशिश होगी कि आठ करोड़ दर्शक हर हफ्ते इस चैनल को देखें। हम युवा पीढ़ी से लेकर बुजुर्ग तक को इसमें समेटने की कोशिश करेंगे।

एक तो पहले से ही एंटरटेनमेंट वर्ल्ड में मारामारी है। ऊपर से एक और चैनल। आपकी क्या प्राथमिकताएं रहेंगी?
बस एक ही प्राथमिकता है। अपने समाज और अपने दर्शक के प्रति संजीदा और ईमानदार रहें। कुछ ऐसा न करें, जो समाज के हित में न हो और ऐसा सब कुछ करें, जो समाज के हित में हो। रचनात्मकता के साथ प्रयोग जरूरी है। किसी चीज का दोहराव न हो। स्टार प्लस को हमने रिश्ता वही, सोच नई के साथ रीलॉन्च किया था। स्टार प्लस बांग्ला को हमने लेट अस चेंज के साथ उतारा। अब हम लाइफ ओके लेकर आ रहे हैं, एक फिलॉसफी के साथ कि ‘जो पास है, वो खास है’।

मनोरंजन की दो भूमिकाएं होती हैं। एक तो लोगों का मनोरंजन करना और दूसरा समाज में जो कुछ हो रहा है या होने वाला है, उसे परिलक्षित करना।

एंटरटेनमेंट टेलीविजन के पहले दस साल काफी अच्छे रहे हैं।

अब लोगों की चाहत, उम्मीदों और सपने को बढ़िया तरीके से प्रस्तुत करने का दौर आया है।

अपने समाज और अपने दर्शक के प्रति संजीदा और ईमानदार रहें। कुछ ऐसा न करें, जो समाज के हित में न हो और ऐसा सब कुछ करें, जो समाज के हित
में हो।

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