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2जी मामला: बेहुरा को नहीं मिली जमानत

2जी मामला: बेहुरा को नहीं मिली जमानत

2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में कथित भूमिका के चलते गिरफ्तार पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा को दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को जमानत देने से मना कर दिया। बेहुरा को इस साल दो फरवरी को पूर्व संचार मंत्री ए़ राजा के साथ गिरफ्तार किया गया था।
   
न्यायमूर्ति वी के शाली ने खचाखच भरे अदालत के कक्ष में बेहुरा की जमानत अर्जी पर फैसला सुनाते हुए कहा कि जमानत अर्जी खारिज की जाती है। न्यायमूर्ति शाली ने हालांकि अपने फैसले का वह हिस्सा नहीं पढ़ा जिसमें पूर्व दूरसंचार सचिव की जमानत अर्जी खारिज किये जाने के आधार का उल्लेख है। इसी अदालत ने 28 नवंबर को 2जी मामले में द्रमुक सांसद कनिमोझी और बॉलीवुड फिल्मकार करीम मोरानी समेत पांच अन्य आरोपियों को जमानत दे दी थी।
   
पांचों आरोपियों को जमानत देते हुए न्यायमूर्ति शाली ने बेहुरा की जमानत अर्जी पर फैसला सुरक्षित रखा था। उन्होंने कहा था कि बेहुरा का मामला अन्य आरोपियों से अलग क्योंकि वह सरकारी अधिकारी थे। अब केवल बेहुरा और पूर्व दूरसंचार मंत्री ए़ राजा जेल में हैं क्योंकि सभी 12 अन्य को अनेक अदालतों ने जमानत दे दी।
   
इससे पहले एक दिसंबर को सुनवाई के दौरान सीबीआई ने उनकी जमानत अर्जी को खारिज करते हुए कहा था कि सरकारी सेवकों की मिलीभगत को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और यदि उन्हें रिहा किया जाता है तो पूर्व मंत्री राजा भी इसी आधार पर राहत मांग सकते हैं।
 
बेहुरा ने कनिमोझी और द्रमुक संचालित कलैंगनर टीवी के प्रबंध निदेशक शरद कुमार और कुसेगांव फूट्रस एंड वेजिटेबल्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों राजीव अग्रवाल और आसिफ बलवा समेत चार अन्य के साथ उच्च न्यायालय से जमानत की मांग की थी। उन्होंने तीन नवंबर के निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी जिसमें उन्हें जमानत से इनकार किया गया था।
   
बेहुरा और अन्य पांच लोगों ने उच्च न्यायालय से जमानत मांगते हुए दावा किया था कि उनकी स्थिति उन्हीं लोगों की तरह है जिन्हें शीर्ष अदालत ने जमानत दी है।

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