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लोकपाल पर सर्वदलीय बैठक में नहीं बनी आम सहमति

लोकपाल पर सर्वदलीय बैठक में नहीं बनी आम सहमति

लोकपाल विधेयक पर बुधवार को हुई सर्वदलीय बैठक में लोकपाल के दायरे में प्रधानमंत्री और निम्न क्रम की नौकरशाही को लाने जैसे प्रमुख विषयों पर राजनीतिक दलों के अलग अलग विचार सामने आये और कोई आम सहमति नहीं बन सकी। उधर प्रधानमंत्री ने वर्तमान संसद सत्र में ही विधेयक पारित कराने के लिहाज से सहयोग मांगा।
   
इस अति गंभीर विषय पर सहयोग और सुझाव मांगते हुए सिंह ने कहा कि लोकपाल विधेयक पर दलीय राजनीति नहीं होनी चाहिए। सरकार यह भी चाहती है कि हमें इसी सत्र में लोकपाल विधेयक पारित करने के सभी प्रयास करने चाहिए जो आम सहमति पर आधारित हो, जो कानून के संरक्षक के तौर पर संसद में बनाई जाए।
   
प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं व्यक्तिगत रूप से चाहता हूं कि यह आवश्यक विधेयक सभी दलों के बीच यथासंभव आम सहमति के आधार पर पारित हो जाना चाहिए और इसमें किसी तरह से दलीय राजनीति नहीं होनी चाहिए। हालांकि करीब तीन घंटे चली बैठक में राजनीतिक दलों के नेताओं के अलग अलग रुख सामने आये। भाजपा ने तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को लोकपाल के अधीन लाने की वकालत की वहीं भाकपा ने इस पर ऐतराज जताया।
   
सूत्रों के मुताबिक भाजपा और अन्य विपक्षी दलों ने सीबीआई की जांचकर्ता इकाई को लोकपाल के दायरे में लाने की मांग की। सूत्रों का कहना है कि हालांकि प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाने के मुद्दे पर भाजपा और वाम दल एकमत दिखे। भाकपा नेता गुरूदास दासगुप्ता ने कहा कि उनकी पार्टी मानती है कि समूह सी और डी के कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में नहीं लाया जा सकता क्योंकि ऐसे करोड़ो कर्मचारी हैं।

वाम दलों ने लोकपाल को संसद के प्रति जवाबदेह बनाने की भी मांग की। अकाली दल नेता सुखदेव सिंह ढींढसा ने कहा कि सीबीआई स्वतंत्र होनी चाहिए लेकिन सीबीआई निदेशक की नियुक्ति में लोकपाल की राय ली जानी चाहिए। लोकपाल में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए आरक्षण की भी जोरदार मांग उठी।
   
इससे पहले बैठक में नेताओं का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार एक अच्छा और प्रभावी लोकपाल विधेयक लाने के लिए प्रतिबद्ध है जिससे हमारी लोक प्रशासन की व्यवस्था की क्षमताओं पर प्रतिकूल असर पड़े बिना भ्रष्टाचार के कैंसर पर लगाम कसने में तेज और सकारात्मक असर पड़ेगा।
   
सभी लोगों से देश के हितों को ध्यान में रखने का अनुरोध करते हुए सिंह ने कहा कि सरकार यह भी चाहती है कि हमें इसी सत्र में लोकपाल विधेयक पारित करने के सभी प्रयास करने चाहिए जो आम सहमति पर आधारित हो और कानून के संरक्षक के रूप में संसद द्वारा यह आम सहमति बनाई जाए।
   
प्रधानमंत्री ने अन्य दलों के नेताओं की ओर से यह संकेत दिये जाने की भी इच्छा प्रकट की कि संसदीय स्थाई समिति की सिफारिशें किस हद तक सदन की भावना से मेल खाती हैं और किस हद तक अनेक प्रावधान व्यावहारिक एवं प्रभावी हैं।
   
इससे पहले प्रधानमंत्री ने संप्रग के सहयोगी दलों के साथ कल इस विषय पर गहन चर्चा की थी जिसमें यह बात सामने आई कि सत्तारूढ़ गठबंधन इस मुददे पर खुद को एकजुट पेश कर रहा है। लोकसभा में 20 दिसंबर को लोकपाल विधेयक को चर्चा के लिए रखा जा सकता है। कार्यक्रम अनुसार इसके दो दिन बाद संसद का शीतकालीन सत्र समाप्त हो रहा है।
   
माना जा रहा है कि सत्र एक दिन बढ़ाया जा सकता है और सरकार इस मकसद से अगले साल जनवरी में एक विशेष सत्र बुलाने के बारे में भी सोच सकती है। इस बीच अन्ना हजारे ने चेतावनी दी है कि वर्तमान संसद सत्र में मजबूत लोकपाल विधेयक पारित नहीं होने पर वह 27 दिसंबर से अनशन पर बैठेंगे।

   

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