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विदेश में भारतीय खाताधारकों की सूची में कोई सांसद नहीं

विदेश में भारतीय खाताधारकों की सूची में कोई सांसद नहीं

विदेश में जमा भारतीयों के काले धन को लेकर व्यापक जानकारी वाला श्वेत पत्र लाने का ऐलान करते हुए वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने हालांकि विपक्ष की इस मांग को नामंजूर कर दिया कि विदेश में भारतीय खाताधारकों के नामों को सार्वजनिक किया जाए। मुखर्जी ने इतना जरुर बताया कि विभिन्न देशों से अब तक इस बारे में जो भी नाम हासिल हुए हैं, उनमें किसी सांसद का नाम नहीं है।
   
वित्त मंत्री ने कहा कि अलग अलग देशों से काले धन को लेकर 3600 तरह की जानकारियां मिली हैं। जिन व्यक्तियों के विदेश में बैंक खाते हैं, उनके नामों की सूची भी हासिल हुई है लेकिन इस जानकारी को यदि सार्वजनिक किया गया तो संबद्ध देश कहेगा कि हमने अंतरराष्ट्रीय समझौते का उल्लंघन किया है।
   
उन्होंने कहा कि दूसरी दिक्कत यह है कि जिन व्यक्तियों के नाम सार्वजनिक होंगे, वे एहतियातन विदेशी बैंकों से अपना धन निकाल लेंगे। सूची सार्वजनिक इसलिए भी नहीं की जा सकती क्योंकि हो सकता है कि उनमें से कई लोगों के वैध खाते हों और उन्होंने निवेश के लिए विदेश में खाता खोला हो। ये न भूलें कि इस समय भारत यूरोप में सबसे बडे निवेशकों में से एक है।
   
भाजपा संसदीय दल के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने काले धन के मुद्दे पर कार्यस्थगन प्रस्ताव पेश किया, जिसे लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने मंजूर कर प्रश्नकाल के बाद चर्चा शुरू करायी। चर्चा पर मुखर्जी के जवाब से असंतुष्ट सपा सदस्यों ने सदन से वाकआउट किया। आडवाणी के जवाब के बाद सदन ने प्रस्ताव को ध्वनिमत से नामंजूर कर दिया।
   
नाम सार्वजनिक करने की विपक्ष की मांग पर मुखर्जी ने दोहराया कि अब प्रश्न यह है कि ऐसे व्यक्तियों के नाम प्रकाशित करें या फिर धन जब्त करें। विदेश स्थित काले धन को वापस लाने के मामले में सरकार की ओर से की गयी कार्रवाई के बारे में मुखर्जी ने कहा कि 18 महीने में दोहरे कराधान से बचने की 22 संधियां की गयीं।
   
उन्होंने कहा कि आम तौर पर इस तरह की संधि नहीं होने पर विभिन्न देश सूचनाएं देने में आनाकानी करते हैं लेकिन अमेरिका सहित समूह-20 में शामिल देशों के दबाव के बाद उन्होंने इस संधि को लेकर वार्ता करनी शुरू की। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने अब तक इस तरह की 75 संधियों में से 60 में नये प्रावधान शामिल कर उन्हें मंजूरी दे दी है। इसमें कर सूचनाओं के आदान प्रदान का प्रावधान है। शेष संधियों को भी जल्द ही संशोधित स्वरूप में मंजूरी मिल जाएगी।
   
उन्होंने बताया कि स्विटजरलैंड के साथ भी इस तरह की संधि सितंबर 2010 में की गयी थी। यह संधि एक अप्रैल 2011 से प्रभावी मानी जाएगी। स्विटजरलैंड के साथ समक्षौता अप्रैल 2011 से प्रभावी होने के कारण उसके पूर्व के वषो की सूचनाएं नहीं मिलने की सदस्यों की आशंकाओं पर मुखर्जी ने कहा कि हमने स्विटजरलैंड से पहली बात यही कही है कि अप्रैल 2011 से पहले की जो जानकारी उपलब्ध है, हमें मुहैया कराये। साथ ही हमने जोर दिया है कि स्विटजरलैंड सरकार अपने यहां मौजूद भारतीयों की संपत्तियों से हासिल होने वाला धन हमें दे।
   
आडवाणी की इस दलील कि सभी पार्टियों के सदस्यों को भाजपा सांसदों की तर्ज पर दोनों सदनों में यह घोषणापत्र देना चाहिए कि विदेश में उनका कोई अवैध बैंक खाता या संपत्ति नहीं है, पर मुखर्जी ने कहा कि वह यदि आयकर रिटर्न फार्म में अलग से एक कालम बनवा दें, जिसमें लिखना हो कि विदेश में कोई अवैध धन जमा है या नहीं तो शायद कोई यह नहीं लिखेगा कि उसके पास विदेश में अवैध धन है।
   
आडवाणी की जनचेतना यात्रा के बारे में मुखर्जी ने कहा कि मैं आडवाणी की जन चेतना यात्रा के लिए उन्हें बधाई देना चाहूंगा। साथ ही कटाक्ष किया कि मैं वित्त मंत्री के रूप में देखना चाहूंगा कि क्या कर चोरों में और काला धन जमा करने वालों में इस यात्रा से जागरूकता आयी कि वे ऐसा न करें और राजकोष की मदद हो सके।
   
काले धन के बारे में विभिन्न संस्थाओं के आंकडों की प्रामाणिकता पर संदेह व्यक्त करते हुए उन्होंने ऐसी संस्थाओं के अस्तित्व और उनके आकलन के मानकों पर सवाल उठाया। वित्त मंत्री ने राष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं द्वारा आकलन किये जाने की सूरत में आंकडों पर यकीन करने की बात कही।
   
काले धन की समस्या से निपटने के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किये जाने के विपक्ष के आरोप पर मुखर्जी ने संयुक्त राष्ट्र के हवाले से कहा कि भारत दुनिया के उन तीन शीर्ष अग्रणी देशों में शामिल है, जो इस दिशा में तेजी से पहल कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सूचनाओं के स्वचालित आदान प्रदान पर जोर दिया है। उन्होंने समूह-20 देशों की बैठक में कहा था कि इस समूह के देशों को अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। तो ऐसा नहीं है कि सरकार ने कोई पहल नहीं की है।
   
कुछ सदस्यों द्वारा यह कहे जाने पर कि विदेश में जमा भारतीयों के काले धन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित किया जाए, मुखर्जी ने कटाक्ष किया कि स्विस बैंक में जमा काले धन को राष्ट्रीय संपत्ति कैसे कहा जा सकता है। उसे हासिल करने के लिए क्या फौज भेजेंगे। भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि वह मुखर्जी के जवाब से असंतुष्ट हैं। वह अपेक्षा करते हैं कि जब वित्त मंत्री इस मुद्दे पर श्वेत पत्र लायें तो बताएंगे कि कितना धन विदेशी बैंकों में जमा है और काले धन की उगाही के लिए सरकार ने अब तक क्या कदम उठाये हैं और आगे क्या करेगी।

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