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सरकार 782 कर चोरों के नाम छुपा रही है: आडवाणी

सरकार 782 कर चोरों के नाम छुपा रही है: आडवाणी

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने बुधवार को सरकार से कहा कि वह 780 से अधिक ऐसे भारतीय नागरिकों के नाम जाहिर करे, जिन्होंने अपना धन विदेशी बैंकों में जमा कर रखा है। इस तरह की कुल धनराशि लगभग 25 लाख करोड़ रुपये बैठती है।

आडवाणी, लोकसभा में अपने स्थगन प्रस्ताव पर बोल रहे थे। यह प्रस्ताव विदेशी बैंकों में अवैध रूप से जमा कराए गए धन से पैदा हो रही स्थिति और दोषी व्यक्तियों के खिलाफ की गई कार्रवाई के सम्बंध में है।

आडवाणी ने कहा, ''संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार 782 कर चोरों के नाम छुपा रही है।''

आडवाणी ने केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की ओर इशारा करते हुए कहा, ''मैं बहस के बाद आपका आश्वासन और आपसे एक शपथ चाहता हूं कि आप कर चोरों के नाम जाहिर करेंगे। सदन को विश्वास दिलाए, देश को विश्वास दिलाए कि आप विदेशी बैंकों में जमा काला धन वापस लाएंगे।''

आडवाणी ने कहा, ''भारतीयों ने स्विस बैंकों में 25 लाख करोड़ काला धन जमा कर रखा है।'' इस संदर्भ में उन्होंने ग्लोबल फाइनेंशियल इंटीग्रिटी की एक रपट का हवाला दिया।

आडवाणी ने कहा कि भारत एक कमजोर देश बन गया है, क्योंकि सरकार दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने में सफल नहीं हो पाई है। आडवाणी ने कहा, ''हमें यह मान लेना चाहिए कि चूंकि हमने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, इसीलिए हमें कमजोर देश के रूप में देखा जा रहा है।''

भ्रष्टाचार और काले धन पर अलख जगाने के निमित्त 40 दिनों की अपनी राष्ट्रव्यापी यात्राा से तरोताजा हुए आडवाणी ने कहा कि स्थगन प्रस्ताव ने सरकार की विफलता को रेखांकित किया है, जबकि नोटिस के शब्दों को बदल कर हल्का कर दिया गया।

आडवाणी ने कहा, ''यह सरकार की विफलता है। आपको इसे स्वीकार करना होगा। यहां तक कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी महसूस किया है कि सरकार इस मामले पर उतना सक्रिय नहीं है, जितना इसे होना चाहिए। हम चाहते हैं कि सरकार काले धन पर जल्द से जल्द एक श्वेत पत्र प्रकाशित करे।''

काले धन पर कार्रवाई में सरकार द्वारा विलम्ब किए जाने पर सवाल खड़ा करते हुए आडवाणी ने सरकार से आग्रह किया कि इस मुद्दे पर त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई की जाए।

आडवाणी ने कहा, ''मैं केंद्रीय वित्त मंत्री से कहना चाहूंगा कि काला धन वापस लाएं, जिसे देश के छह लाख से अधिक गांवों के विकास में इस्तेमाल किया जाए।''

आडवाणी ने इस बात का भी जिक्र किया कि उनसे पूछा जा रहा है कि अपने शासनकाल के दौरान भाजपा ने इस मुद्दे पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। आडवाणी ने कहा, ''स्थिति बदल गई है। उस समय आज जैसी स्थिति नहीं थी। भ्रष्टाचार के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र के संकल्प के बाद स्थिति बदल गई है।''

आडवाणी ने कहा कि दुनिया ने काले धन के खतरों को समझ लिया है। उन्होंने कहा, ''दुनिया ने महसूस किया है कि इस गंदे धन का एक बड़ा हिस्सा आतंकवादियों को जा रहा है। इसके कारण ही संयुक्त राष्ट्र को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक अंतर्राष्ट्रीय संकल्प को पारित करना पड़ा है।''

कांग्रेस के मनीष तिवारी ने हालांकि आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि काले धन का मुद्दा संप्रग सरकार की उपज नहीं है।

 

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