DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

आतंक के60 घंटे और 16 शहीद सिपाही..

मुंबई में आतंक के उन पचास घंटों में हमने जहां अपने 183 साथियों को खोया और 100 साल से भी ज्यादा पुरानी विरासत ताज पर जख्म सहे वहीं देश ने अपने 16 वीर योद्धाआें को भी खोया। इन 16 शहीदों को आज पूरा राष्ट्र नतमस्तक होकर श्रृद्धांजली देता है। बुधवार 26 नवम्बर 2008 की रात कुछ आतंकवादी अपने नापाक इरादों के साथ भारत की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले मुंबई में घुसे और यहां पहुंचकर उन्होंने मौत का खेल खेलना शुरु कर दिया। फिर क्या छत्रपति शिवाजी टर्मिनस और क्या होटल आेबरॉय-ट्राइडैंट और मुंबई की शान माने जाने वाला होटल ताज व नरीमन हाउस। इन्होंने हर जगह अपने नापाक इरादे जाहिर करते हुए खून का तांडव मचाना शुरु कर दिया। देश का अब तक का सबसे बड़ा आतंकवादी हमला माने जा रहे इस हमले पर काबू पाने में सेना, पुलिस, नेवी और एनएसजी को करीब 60 घंटे का समय लग गया। इस दौरान जहां एटीएस ने अपने प्रमुख हेमंत करकरे को खोया बल्कि एनकाउंटर स्पेशलिस्ट विजय सालस्कर भी इस आतंकी कार्रवाई में शहीद हो गए। मुंबई पुलिस के एसीपी अशोक कामटे भी आतंकवादियों के खिलाफ इस अभियान के पहले ही कुछ घंटों में शहीद हो गए। इस बीच आतंकवादियों के खिलाफ लगातार मुहिम चलती रही और देर रात दिल्ली से एनएसजी को भी मुंबई भेजा गया। अब हर किसी को लग रहा था कि आतंकी ज्यादा देर नहीं टिक पाएंगे और जल्द ही उनके हौंसलों को पस्त करने के साथ ही कुछ को मार गिराया जाएगा और कुछ को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। लेकिन ऐसा करना आसान नहीं था, खासकर तब जब आतंकवादियों ने ऐसी जगह पनाह ली हो जहां छुपने के लिए खासी जगह हो। गौरलतब है कि अकेले ताज हैरिटेज में ही 400 से अधिक कमरे हैं और सुरक्षा कर्मियों को यह भी नहीं पता था कि वे कितनी संख्या में हैं और कहां पर छुपे हुए हैं। सुरक्षाकर्मियों या किसी भी अन्य को तो इस बात का भी आभास नहीं था कि आतंकियों के पास कितना विस्फोटक है। इस बीच बस कयास ही लगाये जाते रहे कि आतंकियों का सर्वनाश अब हुआ और तब हुआ। इस बीच हमले की पहली ही रात को दो आतंकी पुलिस की गाड़ी हाईजैक करके लोगों पर गोलियां बरसाते हुए भागे, लेकिन ज्यादा दूर तक नहीं जा सके। इनमें से एक आतंकी को मार गिराया गया जबकि दूसरे को घायल अवस्था में जिदा पकड़ लिया गया। अभी सभी की त्योरियां पाकिस्तान की तरफ चढ़ ही रहीं थी कि पकड़े गए आतंकी ने खुलासा कर दिया कि वह पाकिस्तान का निवासी है और इस हमले की साजिश पाकिस्तान में ही रचि गई थी। इसके बाद उसने जो खुलासा किया उससे किसी के भी पांव के नीचे की जमीन खिसक जाए। उसने बताया कि जितना गोला-बारूद वह मुंबई में लेकर आए थे उससे ज्यादा उन्हें समुंद्र में भेंकना पड़ा। खैर जो भी हो दूसरे दिन दोनों होटलों और नरीमन हाउस में दोनों तरफ से गोलीबारी होती रही, बीच बीच में आतंकियों ने हैंड ग्रेनेड फैंके जिससे ताज में आग भी लग गई। नरीमन हाउस और होटल आेबरॉय ट्राइडेंट को 28 नवम्बर को ही आतंकियों से खाली करा लिया गया था। आखिरकार तीसरे दिन सुबह मुंबई में सूरज की पहली किरण के साथ ही एक खुशखबरी आई कि ताज होटल से भी आतंकियों का खात्मा कर दिया गया है। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं की गई लेकिन सूरज की पहली किरण के साथ लोगों में आशा की उम्मीद ने भी धीरे-धीरे विश्वास जगाया। एटीएस ने पूरे होटल की छानबीन किए बिना सभी आतंकियों के खात्मे की घोषणा नहीं की लेकिन सुबह-सबरे ही उनकी शारीरिक भाषा से साफ हो गया था कि अब आतंकी ताज में मौजूद नहीं हैं। इस बीच लगभग 60 घंटे तक चली इस कार्रवाई में जहां 183 लोग मारे गए और 300 से अधिक लोग घायल हो गए। इस बीच हमारी सुरक्षा एजेंसियों ने अपने कई जांबाज सिपाहियों को खोया। सुरक्षा एजेंसियों ने अपने जिन सिपाहियों को खोया उनमें एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे, एसीपी अशोक कामटे, एनकाउंटर स्पेशलिस्ट विजय सालस्कर, कमांडो गजेन्द्र सिंह, मेजर संदीप उन्नीकृष्णन, इंस्पेंक्टर शशांक शिंदे, सब इंस्पेक्टर प्रकाश मोरे, ए आर चितले, कांस्टेबल विजय खांडेकर, वी आेबाल, सब इंस्पेक्टर बाबूसाहब दुरगुडे, नानासाहब भोंसले, कांस्टेबल जयवंत पाटिल, कांस्टेबल योगेश पाटिल, कांस्टेबल अंबादास पवार, रेलवे पुलिस एम सी चौधरी शामिल थे।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: आतंक के60 घंटे और 16 शहीद सिपाही..