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टीवी देख कर आतंकी योजना बदलते रहे

मुम्बई में अपनी योजनाओं को अंजाम देने के लिए आतंकवादियों ने जिस समुद्री रास्ते का इस्तेमाल किया उन समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के लिए केंद्र की सुरक्षा योजनाओं पर पहल नहीं की गई। 720 किलोमीटर के तटीय सीमा पर सुरक्षा मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2006 में चार अरब रुपये की स्वीकृति दी थी। इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) रॉ व सेना के खुफिया विंग ने भी केंद्र सरकार को इस संभावना से अगाह किया था कि भारत में सुरक्षा , परमाणु बिजली घर , संवेदनशील इमारतें और महत्वपूर्ण व्यापारिक ठिकानों व धार्मिक स्थालों को निशाना बनाने के लिए आंतकवादी समुद्री रास्ते का इस्तेमाल कर सकते हैं। तटीय इलाकों की सुरक्षा के लिए महाराष्ट्र सरकार ने समय पर पहल की होती तो इन हादसों को टाला जा सकता था। योजना के तहत समुद्री इलाकों में 73 पुलिस थाने ,पुलिस चेक पोस्ट ,204 मोटर बोट और 153 पिट्रोल जीपें तथा 312 मोटर साइकिलें तैनात की जानी थीं। लेकिन राज्य सरकार की लापरवाही के कारण धन उपलब्ध करा दिये जाने के बावजूद महाराष्ट्र सरकार ने उस पर अमल नहीं किया। मुम्बई को निशाना बनाने से पहले आतंकियों ने अनेक ठिकानों का जायजा लिया था। ताज ,ट्राइडेंट और नरीमन हाऊस में सुरक्षा बलों को ललकारने वाले आंतकवादी होटल में निकास , प्रवेश , सुरक्षा बलों के हमले से बचाव के ठिकानों के अलावा उनके सभी रास्तों से परिचित थे । मुम्बई जाने से पहले आतंकवादियों को कराची में ट्रेनिंग दी गई और इन होटलों के ब्लू प्रिंट को समझाया गया। अमेरिका और ब्रिटेन के मेहमानों पर कोई रहम नहीं किया गया। रॉ में तैनात एक अधिकारी ने शनिवार को बतायकि कमरों में पनाह ले रखे आंतकवादी उनके बार में टीवी चैनलों पर प्रसारित हो रही खबरों को देख कर अपनी रणनीति में बदलाव करते रहे। आंतकवादी वह सभी कुछ देख-सुन रहे थे जो पूरा देश देख-सुन रहा था। गिरफ्तार किये गए एक आतंकी अजमल अमीन कमाल ने समुद्री रास्ते को सुरक्षित बताया है। होटलों में ठहर विदेशी और भारतीय मेहमानों को मारने से पहले आंतकवादियों ने उनकी राष्ट्रीयता , धर्म भारत से उनके भारत से ताल्लुक के बार में जानकारी ली। कुच्छेक मेहमान जो मुस्लिम देशों के थे उन पर रहम करते हुए उन्हें भाग जाने को कहा गया। उनमें जो बाहर जाने से परहेा करना चाहते थे उन्हें आंतकियों का संरक्षण भी मिला। लेकिन जिस किसी ने साहस दिखाया उन्हें मार गिराया गया। इस सबके बावजूद भी मुंबई में आतंकवादियों को मार गिराने में समझौता न करने की जिस नीति का अनुसरण किया गया, उससे दूर-दूर तक कड़ा संदेश गया है। यह संदेश आतंकवादियों के आकाओं के मंसूबों को तोड़ने और उनके दिमागी बल को कमजोर करने में मदद करगा। साठ घंटे चले आपरेशन में यह बात स्पष्ट होकर उभरी है कि भारत में आतंकवाद के मसले पर ‘नो कंप्रोमाक्ष‘ की अदृश्य नीति पर अमल होने लगा है। मुंबई में ताज होटल, ओबराय होटल और नारीमन हाउस में लोगों को बंधक बनाने वाले आतंकियों ने समझौते की पेशकश की थी। नारीमन हाउस से उन्होंेने सफेद तौलिया तक लहराया लेकिन एनएसजी ने उस ओर ध्यान दिया नहीं दिया। आतंकियों की ओर से एक टीवी चैनल को फोन तक किया गया। लेकिन महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक एएन राय ने स्पष्ट कर दिया था कि आतंकियों से समझौता नहीं होगा। यह उन्होंने तब कहा जब एटीएस चीफ हेमंत करकर, अशोक काम्टे और सालस्कर जसे अधिकारियों समेत 12 पुलिसकर्मी आतंवादियों का निशाना बन चुके थे। सुरक्षा मसलों से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि भारत में बंधक स्थिति से निपटने के लिए कोई लिखित नीति नहीं है, जसा कि वायुयान हाक्षैक के केस में है। वायुयान हाक्षैक नीति भी बहुत कड़ी नहीं है, लेकिन फिर भी इसे संतोषजनक कहा जा सकता है। आपरशन में बंधकों के मार जाने की इजरायली आलोचना के संदर्भ में अधिकारी ने कहा कि यह तो होगा ही। रूस में बेसलान स्कूल बंधक कांड में हुए आपरशन में सौ ज्यादा बच्चे मार गए थे। लेकिन कठोर संदेश देने के लिए रूस ने यह जरूरी समझा। रूसी कार्रवाई की अमेरिका ने समेत अनेक देशों ने निंदा की थी। यह अलग बात है कि अमेरिका की भी यही नीति है कि बंधक बनाने वालों से कोई समझौता नहीं हो।

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