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मसूद के भरोसे मुस्लिम वोट बैंक मजबूत करेगी कांग्रेस

उत्तर प्रदेश विधानसभा के आगामी चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत करने के लिए अब कांग्रेस को समाजवादी पार्टी (सपा) से त्यागपत्र देने की घोषणा कर चुके पूर्व सांसद रशीद मसूद का सहारा मिल गया है।

मसूद ने रविवार को सपा और राज्यसभा की सदस्यता से त्यागपत्र देकर कांग्रेस में शामिल होने की घोषणा की थी। मसूद ने आज अपना इस्तीफा सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव को सौंप दिया। उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता से त्यागपत्र भी सभापति को भेज दिया है।

आजम खां के सपा में शामिल होने के बाद खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे मसूद ने कहा कि सपा अपनी नीतियों से हट गई है। सपा विधायक और मसूद के भतीजे इमरान मसूद ने भी पार्टी से त्यागपत्र दे दिया है। वह भी कांग्रेस में शामिल होंगे।

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने आज यहां कहा कि मसूद को प्रदेश कार्यसमिति में तथा केन्द्र सरकार के किसी संगठन में अध्यक्ष का पद देकर कैबिनेट मंत्री का भी दर्जा दिया जा सकता है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी के पास कोई ऐसा मुस्लिम नेता नहीं है जिसकी गहरी पैठ हो। इस मामले में मसूद एकदम फिट बैठते हैं।

मसूद ने कहा कि सपा से इस्तीफा देने के बाद में उसी पार्टी से राज्यसभा सदस्य बना रहूं, यह मेरे सिद्धांत के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि धर्मनिरपेक्ष ताकतों को मजबूत करने के लिए वह कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं। मसूद का कहना है कि पिछड़ा वर्ग के 27 प्रतिशत आरक्षण में मुसलमानों को अलग से कोटा दिए जाने के मामले से सपा पहले के निर्णय से पलट गई। उन्होंने इस मामले में सपा अध्यक्ष को पत्र भी लिखा था। मसूद ने यह भी आरोप लगाया कि सपा में वापस आने के बाद खां ने पार्टी पर कब्जा कर लिया है। पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव और प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव अवश्य हैं लेकिन सभी फैसले आजम खां ही लेते हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अति पिछड़ों के आरक्षण में मुसलमानों को अलग से कोटा देने का भरोसा दिलाया है।

मसूद ने कहा कि उनके भतीजे भी कांग्रेस के टिकट पर ही विधानसभा का आगामी चुनाव लड़ेंगे। वह सहारनपुर की सात विधानसभा सीटों पर अपने पसन्द का प्रत्याशी उतारेंगे। उम्मीद है कि कांग्रेस इन पर अपनी सहमति दे देगी।

मसूद के राज्यसभा के सदस्य का कार्यकाल चार जुलाई 2016 तक था। वह सपा के टिकट पर दूसरी बार राज्यसभा के सदस्य बने थे। श्री मसूद 1977, 1980, 1989, 1999 और 2004 के संसदीय चुनाव में लोकसभा के लिए चुने जा चुके हैं। वह विश्वनाथ प्रताप सिंह के मंत्रिमंडल में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री थे।

मुस्लिम वोट बैंक को पार्टी में वापस लाने के लिए कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने मुसलमानों की प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्था नदवा दारूल उलूम पहली बार जाकर वहां के मुखिया आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के अध्यक्ष और बुजुर्ग मुस्लिम विद्वान राबे हसन नदवी से कल मुलाकात की थी।

गांधी ने अपने दो दिवसीय दौरे के कल अन्तिम दिन नदवी से अकेले में करीब एक घन्टे बातचीत की। उन्होंने मुसलमानों के लिए केन्द्र सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की उन्हें जानकारी दी और उनसे कुछ सुझाव मांगे। थोडी देर वह वहां के छात्रों के भी बीच रहे।

गांधी की मुस्लिम विद्वान नदवी से मुलाकात को उनके मिशन 2012 से जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें सफलता के लिए वह एड़ी चोटी का जोर लगा रहे है। मुसलमान कभी कांग्रेस का ठोस वोट बैंक हुआ करता था लेकिन छह दिसम्बर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचा गिराए जाने के बाद यह छिटककर सपा के पक्ष में चला गया।

गांधी की नदवी से मुलाकात को उत्तर प्रदेश में लगभग हाशिए पर मानी जा रही कांग्रेस को आत्मनिर्भर बनाने का एक दूरदृष्टि भरा कदम माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि गांधी मिशन 2012 की तैयारी के साथ ही 2014 में प्रस्तावित लोकसभा चुनाव के लिए मजबूत आधारशिला रखना चाहते हैं क्योकि लोकसभा के आगामी चुनाव में वह प्रधानमंत्री पद के दावेदार हो सकते हैं।

नदवा कालेज को मुसलमानों में काफी प्रभाव है और इसमें देश विदेश के छात्र पढ़ने आते हैं। गांधी का नदवा दौरा मुस्लिमों को रिझाने का एक प्रयास भी माना जा रहा है।

मुसलमानों में नदवा कालेज के प्रति अच्छी सोच की वजह से इसमें आने वाले नेताओं की लम्बी सूची है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेता चुनाव के समय तो वहां जरूर जाते हैं। एक बार तो भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता दिवंगत प्रमोद महाजन ने भी वहां अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी।

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