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मुंबई बम विस्फोट मामले में फैसला टला

मुंबई बम विस्फोट मामले में फैसला टला

मुंबई में वर्ष 2003 में दोहरे बम विस्फोट मामले में बंबई उच्च न्यायालय ने एक महिला सहित तीन अभियुक्तों की मौत की सजा पर अपना फैसला सोमवार को टाल दिया। बम विस्फोट की घटना में 52 लोगों की जान चली गयी थी। न्यायाधीश एएम खानविलकर ने कहा कि फैसला अगले सप्ताह या फिर जनवरी के पहले सप्ताह में सुनाए जाने की संभावना है, जब अवकाश के बाद अदालत का कार्य आरंभ होगा।
    
खानविलकर ने अपने कक्ष में कहा कि चूंकि पीठ के उनके सहयोगी न्यायाधीश का अदालत के नागपुर पीठ में तबादला हो गया, इसलिए फैसला अब तक तैयार नहीं हो पाया है। आतंक निरोधी अधिनियम (पोटा) अदालत ने अगस्त 2009 में दो टैक्सी में बम रखने का दोषी मानते हुए अशरत अंसारी (32) उसके सहयोगी हनीफ सैयद अनीस (46) और पत्नी फहमीदा सैयद (43) को मौत की सजा सुनायी थी।
    
गेटवे ऑफ इंडिया और जावेरी बाजार के पास दोनों टैक्सी में विस्फोट हुआ था, जिसमें 52 लोगों की जान चली गयी थी। पीठ ने 12 नवंबर को इस मामले में अभियोजन की दलील सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
 
2003 के दोहरे बम विस्फोट की जांच एजेंसी आतंकवाद निरोधक दस्ते और मुंबई क्राइम के अधिकारियों का कहना है कि आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तोयबा ने गुजरात में 2002 में हुए सांप्रदायिक दंगे का बदला लेन के लिए यह विस्फोट कराया था।
 
दक्षिण मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया और झावेरी बाजार में 25 अगस्त 2003 को टैक्सी में बम छिपाकर विस्फोट को अंजाम दिया गया था जिसमें करीब 52 लोगों की मौत हो गई थी और 100 से अधिक जख्मी हुए थे। एटीएस ने इस दोहरे बम कांड में कुल आठ लोगों को गिरफ्तार किया था।

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