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पाटिल किनारे, पीएम ने संभाली कमान

आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे की कमान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सीधे अपने हाथ में ले ली है और लगता है, गृह मंत्री शिवराज पाटिल को इससे अलग रहने को कहा गया है। शनिवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मुंबई में आतंकी हमले से निबटने के अभियान, क्षति और सुरक्षा चूकों के बारे में रक्षा और गृह मंत्रालयों के अफसरों के साथ विचार-विमर्श किया। सिंह ने इस मुद्दे पर लगभग दो घंटे तक रक्षामंत्री ए.के. एंटोनी, खुफिया एजेंसियों और सशस्त्र बलों के अधिकारियों के साथ भी गंभीर मंत्रणा की। अलबत्ता पाटिल इन मंत्रणाओं में शामिल नहीं थे क्योंकि उन्हें प्रधानमंत्री ने बुलाया ही नहीं। माना जाता है कि प्रधानमंत्री मुंबई की आतंकी मुठभेड़ से निपटने के पाटिल के तरीकों से क्षुब्ध हैं। प्रधानमंत्री ने दोनों बैठकों से जिस तरह पाटिल को अलग रखा, उसका निहितार्थ लगाया जाना उचित ही है। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल फली होमी मेजर को तीनों सेनाध्यक्षों की प्रधानमंत्री के साथ बैठक के लिए खास तौर से रुकने का अनुरोध किया गया। उन्हें राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज के एक समारोह में भाग लेने देहरादून जाना था। थलसेना प्रमुख जनरल दीपक कपूर इन दिनों दक्षिण अफ्रीका और बोत्स्वाना की यात्रा पर हैं। उनकी जगह थलसेना उपप्रमुख ले.ज. एम.एल. नायडू ने बैठक में हिस्सा लिया। हालांकि गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि प्रधानमंत्री की बैठक में पाटिल इसलिए नहीं गए क्योंकि वे दूसरी बैठक में व्यस्त थे लेकिन सच यह है कि पाटिल ने शनिवार को ही सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों के साथ बैठक की थी लेकिन प्रधानमंत्री की बैठक तक वह खत्म हो चुकी थी। यह बताने की जरूरत नहीं कि पाटिल के कामकाज को लेकर सरकार की लगभग किरकिरी होती रही है। हर आतंकी घटना के बाद पाटिल का कोई ऐसा बयान आता है जिस पर गंभीर होने की जगह लोग मुस्कुराने लगते हैं। यही नहीं, कैबिनेट की कई बैठकों में मंत्रियों ने ही पाटिल की आलोचना की है।

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