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लंका

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फिल्म की कहानी उत्तर प्रदेश का जिला बिजनौर की है, जहां जसवंत सिसौदिया यानी भाईसाइब के नाम का सिक्का चलता है। बिजनौर जिले के मुख्य चिकित्साअधिकारी (यतिन करयेकर) की लड़की अंजू (टिया बाजपेयी) के साथ भाईसाइब जबरन शारीरिक संबंध बनाता है और उसके परिवार को दबाव में यह सब सहना पड़ता है। जिले के एसपी भूप सिंह (यशपाल शर्मा) जसवंत के रसूख के चलते चाहकर भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाता।

भाईसाहब अपने ताऊ राजबीर के सामने ही बड़ा हुआ था इसलिए उसके मरने के बाद उसके लड़के (अजर्न बाजवा) को बहुत ही दिलोजान से पढ़ाता-लिखाता है, लेकिन अजर्न का वहां मन नहीं लगता और वह वापस आ जाता है और भाईसाहब का अंजू के साथ बर्ताव उसको अंदर से झकझोर देता है खासतौर से अंजू का उसके साथ घुट-घुटकर रहना अजर्न को बगावत पर मजबूर कर देता है और वह अंजू को वहां से भगाने की कोशिश करता है लेकिन जसवंत उसको  गोली मार देता है और अंजू मौका पाकर भाईसाइब को गोलीमार कर वहां से निकल जाती है। 

फिल्में चलने के लिए तीन चीजें चाहिए होती हैं इंटरटेनमेंट, इंटरटेनमेंट और इंटरटेनमेंट। लेकिन फिल्म के डायरेक्टर मकबूल खान ने इसी चीज को फिल्म से नदारद कर दिया है। और तर्क यह है कि यह भावनाओं पर बनी फिल्म है। इसमें कोई दो राय नहीं कि फिल्म की कहानी आपको रोचक लगेगी, डायरेक्टशन, सिनेमैटोग्राफी सबकुछ ठीक-ठाक लगेगा, लेकिन फिर भी फिल्म थकी हुई लगती है। जिसके पीछे सबसे बड़ी वजह फिल्म में मसाला आइटम की कमी है। एक आइटम सांग डाल कर इस कमी को भरने की असफल कोशिश की गयी है।

फिल्म को देखकर आपको शक्ति: द पॉवर और हालिया रिलीज हुई मूवी साहब, बीबी और गैंगस्टर की याद बरबस ही आ जाएगी। छोटे शहर में किसी एक रौबदार या रसूख वाले के रुतबे पर बॉलीवुड में ढेरों फिल्में बनी हैं। यह फिल्म भी उसी लिस्ट में महज एक नाम है। बतौर संगीतकार तोषी और शारिब शाबरी  ने भी निराश ही किया है।

फिल्म की एक बात जो संतोषजनक है वह है फिल्म के कलाकारों की एक्टिंग। मनोज बाजपेयी इस रोल के लिए परफेक्ट लगे हैं तो वहीं टिया बाजपेयी के चेहरे की  मासूमियत उनके किरदार के साथ सटीक बैठती है। मजबूर पिता के किरदार को यतिन ने बखूबी निभाया है, चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में चेतन शर्मा ने अपने रोल के साथ पूरी मेहनत की है।

फिल्म में एक खूबी यह है कि डायरेक्टर ने टिया की मर्दाना आवाज को भांपकर उनको पूरी फिल्म में महज 10-15 डॉयलाग ही बोलने का मौका दिया। बतौर प्रोडय़ूसर विक्रम भट्ट की असफल फिल्मों में शायद ये सबसे बड़ी फ्लॉप होगी, अगर यूपी, बिहार के सिनेमाघरों ने इसको सहारा न दिया तो!

सितारे: मनोज बाजपेयी, टिया बाजपेयी, अजर्न बाजवा, यशपाल शर्मा, मनीष चौधरी, यतिन करयेकर, श्वेता साल्वे, चेतन शर्मा (चाइल्ड आर्टिस्ट)
निर्देशक: मकबूल खान
निर्माता: विक्रम भट्ट
बैनर: बिविजी फिल्म्स
लेखक: शशांक डबराल
संगीतकार: तोषी, शारिब

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