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मरने वाला जीवित, पर हत्या के आरोपी जेल में...

मरने वाला जीवित, पर हत्या के आरोपी जेल में...

उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को इस बात की न्यायिक जांच का आदेश दिया कि क्या झांसी का रहने वाला वह व्यक्ति जीवित है, जिसकी हत्या के आरोप में उसी के गांव के चार व्यक्ति पिछले 11 वर्ष से जेल में हैं।
    
न्यायमूर्ति आर एम लोढ़ा और न्यायमूर्ति एच एल गोखले की पीठ ने इससे पूर्व उन चार आरोपियों को उनकी इस अपील पर जमानत दे दी कि उन्हें जिस व्यक्ति की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा दी गई है, वह जीवित है। पीठ ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा उसके समक्ष किए गए इस दावे के बाद न्यायिक जांच का आदेश दिया कि मारा गया व्यक्ति दरअसल मर चुका है।
    
उप्र पुलिस ने पीठ को यह भी बताया कि मारा गया व्यक्ति भगवान दास, आरोपियों ने जिसके जीवित होने का दावा किया है दरअसल मरने वाले का हमनाम और सौतेला भाई है। पुलिस का दावा है कि उसने यह गलत दावा करने के लिए संवाददाता सम्मेलन बुलाया कि वह जिंदा है और उसकी कथित हत्या के आरोप में चार लोग आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे हैं।
    
शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार के वकील रत्नाकर दास के दावों को दरकिनार करते हुए झांसी के सत्र न्यायाधीश को जांच करने और रहस्य से पर्दा उठाने को कहा। पीठ ने कहा कि भगवान दास की मौत हुई या नहीं इस बारे में सारे तथ्य न्यायिक जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे। जांच का कार्य झांसी के सत्र न्यायाधीश करेंगे और 24 जनवरी के तीन माह बाद अपनी रिपोर्ट शीर्ष न्यायालय को सौंप देंगे।
    
पीठ ने उत्तर प्रदेश के सरकारी वकील और चारों आरोपियों को झांसी सत्र न्यायाधीश के सामने 24 जनवरी को पेश होने और अपने दावे से संबंधित सुबूत पेश करने को कहा। चार नवंबर को शीर्ष अदालत की पीठ ने चार व्यक्तियों को जमानत पर रिहा कर दिया था। इन चारों ने इस अपील के साथ अदालत के दर पर दस्तक दी थी कि उनके साथ इंसाफ नहीं हुआ। वह एक ऐसे व्यक्ति की हत्या के आरोप में पिछले 11 वर्ष से जेल में बंद हैं, जो दरअसल जिंदा है।

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