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किसी को खुश करने के लिए नहीं लोकपाल रिपोर्ट: सिंघवी

किसी को खुश करने के लिए नहीं लोकपाल रिपोर्ट: सिंघवी

सीबीआई और समूह सी तथा डी श्रेणी के कर्मचारियों को लोकपाल के अधीन नहीं लाने का बचाव करते हुए लोकपाल विधेयक पर विचार करने वाली संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष अभिषेक सिंघवी ने अन्ना हजारे का नाम लिये बिना शुक्रवार को कहा कि उनकी रिपोर्ट किसी को खुश या नाराज करने के लिए तैयार नहीं की गई है।
   
रिपोर्ट को संसद के दोनों सदनों में पेश किये जाने के बाद सिंघवी ने कहा कि यह रिपोर्ट किसी व्यक्ति या संस्था को खुश या नाराज करने के लिए नहीं तैयार की गयी थी। हमें किसी को संतुष्ट नहीं करना या किसी से प्रमाणपत्र नहीं लेना है। लोकपाल के गठन संबंधी संवैधानिक संशोधन विधेयक के कारण विलंब होने की सभी आशंकाओं को सिंघवी ने निराधार बताया। उन्होंने कहा कि इसमें कोई विलंब नहीं होगा।
   
समिति की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि प्रस्तावित लोकपाल के लिए संवैधानिक संशोधन विधेयक, सांविधिक विधेयक से कहीं अधिक संक्षिप्त है और इसे उसी दिन तथा उसी वक्त बाद में अलग बहुमत से पारित कराया जा सकता है। उन्होंने माना कि समिति में समूह सी और डी श्रेणी के कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे से बाहर रखने का सबसे ज्यादा विरोध हुआ है।
   
उन्होंने कहा कि स्थायी समिति एक लघु संसद होती है। इसमें हर मुद्दे पर सदस्य खुलकर विचार विमर्श करते हैं। समिति में किसी के प्रस्ताव पर रबड़ स्टांप नहीं लगाया गया। सिंघवी ने कहा कि समूह सी और डी के कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में लाने के मुद्दे पर सबसे ज्यादा विरोध था। समिति ने इन वगो के कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे से बाहर रखने की जो सिफारिश की है, उससे 17 लोगों ने सहमति जतायी है जबकि 13 सदस्य इससे असहमत थे।
   
लोकपाल विधेयक के लिये अन्ना हजारे को श्रेय दिये जाने के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि संसद की स्थायी समिति किसी को श्रेय देने के लिए काम नहीं करती। उसे जिस विषय पर विचार करने की जिम्मेदारी दी जाती है, उसके हर पहलु पर विचार विमर्श कर वह अपनी सुविचारित राय देती है। यह एक संसदीय दायित्व है और इसमें किसी को श्रेय देना का सवाल ही नहीं उठता।
   
लोकपाल विधेयक को संसद की जल्द मंजूरी दिलाने के संबंध में सरकार की मंशा के बारे में पूछे जाने पर सिंघवी ने कहा कि यदि ऐसा नहीं होता तो इतने कम समय में समिति अपनी रिपोर्ट तैयार नहीं करती। उन्होंने कहा कि सरकार इस विधेयक को जल्द से जल्द पारित करवाना चाहती है लेकिन संसद केवल सरकार की मंशा से नहीं अन्य बातों से चलती है। शीतकालीन सत्र के शुरूआती दो हफ्ते बाधित रहे हैं।
   
उन्होंने कहा कि समिति ने करीब 24 मुद्दों पर विचार विमर्श किया। इसमें 13 मुद्दों पर सभी सदस्यों के बीच सर्व सम्मति थी। दस मुद्दे ऐसे थे जिन पर महज एक दो अलग अलग सदस्यों ने विरोध जताया था। सिंघवी ने दावा किया कि भारत के इतिहास में पहली बार इतनी सशक्त संस्था के लिए संसदीय समिति ने सिफारिश की है। उन्होंने कहा कि इससे भ्रष्टाचार को रोकने में काफी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इसके नतीजों पर टिप्पणी करने से पहले इसको कामकाज के लिए कुछ समय दिया जाना चाहिए।

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