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जेएनयू में छात्र संघ चुनाव पर लगी रोक हटी

जेएनयू में छात्र संघ चुनाव पर लगी रोक हटी

सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों को लिंगदोह समिति की कुछ सिफारिशों में भी दी छूट, छात्र संगठन छुट्टी खत्म होने पर जानेंगे राय

सुप्रीम कोर्ट ने जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्र संघ के चुनावों पर लगी रोक को हटाकर चुनाव कराने की अनुमति दे दी है। कुछ दिशानिर्देशों का पालन न करने के कारण चुनाव पर 2008 में रोक लगा दी गई थी। वहीं, सुप्रीम कोर्ट के फैसले को छात्र संकठनों ने सराहा है। छात्र संगठनों ने इस मामले में छात्रों की राय जानने के लिए कहा है। छात्र संगठनों का कहना है कि जेएनयू में फिलहाल छुटिटय़ां है, ऐसे में विश्वविद्यालय खुलने पर छात्रों से इस मसले में राय ली जाएगी। 

चुनाव की अनुमति देते हुए जस्टिस ए.के. गांगुली की अध्यक्षता वाली पीठ ने छात्रों के चुनाव लड़ने के लिए लिंगदोह समिति की कुछ सिफारिशों में भी छूट दी। इसके अलावा, चुनाव के लिए उम्र सीमा 28 साल से बढ़ाकर 30 साल कर दिया और 75 फीसदी उपस्थिति की शर्त को भी पूर्णतया समाप्त कर दिया। हालांकि कोर्ट ने कहा कि 5,000 से ज्यादा पर्चों का इस्तेमाल न करने की समिति की सिफारिश चुनाव में भी जारी रहेगी। छात्र संघ की ओर से अधिवक्ता संजय पारिख ने बहस की।

शीर्ष कोर्ट ने अक्तूबर 2008 में इन चुनावों पर रोक लगा दी थी और शीर्ष कोर्ट द्वारा स्वीकार की गई लिंगदोह समिति की सिफारिशों का पालन न करने पर कुलपति और रजिस्ट्रार के खिलाफ अवमानना के नोटिस जारी किए थे। सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में छात्र संघ चुनाव में सुधार और उन्हें धन और बाहुबल से बाहर निकालने के लिए पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त जे.एम. लिंगदोह की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था। समिति ने सितंबर 2006 में छात्रसंघों के स्वच्छ और व्यवस्थित चुनाव के लिए अपनी सिफारिशें और दिशानिर्देश दिए थे जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर सभी विश्वविद्यालयों से अपनाने को कहा था।

2008 से शीर्ष कोर्ट ने लगा रखी थी रोक, दिशानिर्देश के उल्लंघन पर 

75%उपस्थिति की शर्त भी खत्म, उम्र सीमा 28 से बढ़ाकर 30 साल

यह फैसला सराहनीय
 
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की जेएनयू कार्यकारिणी की अध्यक्ष गायत्री दीक्षित ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा आया फैसला सराहनीय है। लेकिन अभी पूरी जीत नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि हमारी मांग थी कि किसी भी उम्मीदवार को दो बार चुनाव लड़ने का मौका मिले जिसे पूर्ण तौर पर नहीं माना गया है। 

नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया की जेएनयू इकाई के अध्यक्ष मनोरंजन महापात्र का कहना है कि यह फैसला वाकई में खुशी देने वाला है। छात्रों से इस मामले में राय मांगी जाएगी। यूथ फॉर इक्विलटी की कार्यकारिणी के सदस्य अमित रंजन ने कहा कि यह फैसला छात्र हित में है। आगे बदलावों को लेकर बातचीत जारी रहेगी। एआईबीएसएफ के जितेंद्र ने कहा कि इन नियमों के आधार पर बनने वाला छात्र संघ से किसी बड़े परिवर्तन की उम्मीद करना बेमानी होगा।

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