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सैन्य अधिकारी 15 साल में बन सकेंगे कर्नल

सेना के स्वरूप को और युवा बनाने के उद्देश्य से लिए गए एक महत्वपूर्ण फैसले के बाद अब सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल रैंक के अधिकारी को कर्नल का रैंक 15 वर्षो की सेवा पर ही मिल जाएगा। अभी तक कर्नल बनने के लिए 20 वर्ष लग जाते थे। इससे कर्नल रैंक के प्रौढ़ अधिकारियों के स्थान पर युवा अधिकारी मोर्चा संभालने के लिए तैयार होंगे। स्मरण रहे कि 1े करगिल युद्ध में पहाड़ी चोटियों पर दुश्मन से सीधी टक्कर लेफ्टिनेंट, कैप्टन और मेजर रैंक के युवा अधिकारी ले रहे थे जबकि कर्नल रैंक के अधिकारी पहाड़ों पर चढ़ने के बजाय नीचे से कमान संभाले हुए थे। इस युद्ध के बाद गठित करगिल समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की थी कि सेना का युवा स्वरूप बनाने के लिए कमांडिंग अफसरों की आयु सीमा की प्रोफाइल को घटाया जाए ताकि फील्ड में यूनिट कमांडर युवा हों और ज्यादा जोश व बहादुरी से लड़ सकें। एसी ही सिफारिशें अजय विक्रम सिंह कमेटी और छठे वेतन आयोग ने भी की थीं। इस समय आम तौर पर जब सेना का कोई अफसर 40 की उम्र का होता है तब कर्नल रैंक तक पहुंच पाता है। सूत्रों के मुताबिक, ताजा फैसले के तहत नौसेना में कैप्टन और वायुसेना में ग्रुप कैप्टन के समकक्ष रैंक पर भी 15 वर्षो की सेवा का नियम लागू होगा। सरकार के फैसले की जानकारी सेना मुख्यालय को दे दी गई है। यूनिट कमांडर आम तौर पर कर्नल होता है लेकिन अभी तक 16 वर्ष की सेवा के बाद लेफ्टिनेंट कर्नल से काम तो यूनिट कमांडर यानी ‘कार्यवाहक कर्नल’ के रूप में लिया जाता था लेकिन पूर्ण कर्नल का रैंक पाने के लिए उसे चार साल और इंतजार करना पड़ता था। सूत्रों ने यह भी साफ किया है कि विरले, आतंक निरोधक कार्रवाइयों या जंगी हालात में अब भी कार्यवाहक कर्नल, नौसेना में कैप्टन और वायुसेना में ग्रुप कैप्टन को यूनिट कमांडर के रूप में काम पर लगाया जा सकता है। सरकार के इस फैसला का कोई वित्तीय भार नहीं पड़ेगा क्योंकि कर्नल रैंक के पदों के लिए पहले ही मंजूरी मिल चुकी है।ं

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