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लोकपाल के दायरे में आ सकते हैं PM

लोकपाल के दायरे में आ सकते हैं PM

लोकपाल मुद्दे पर बनी संसद की स्थायी समिति ने फाइनल ड्राफ्ट में प्रधानमंत्री को कुछ शर्तों के साथ लोकपाल के दायरे में लाने की सिफारिश की है और इस मुद्दे पर अंतिम फैसला संसद पर छोड़ दिया हैं।

पीएम के कुछ फैसले लोकपाल के दायरे से बाहर होंगे, जैसे - राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश मामले, परमाणु ऊर्जा और राष्ट्र हित से जुड़े मुद्दे। पहले बनाए गए ड्राफ्ट में इस बारे में कुछ नहीं कहा गया था। गौरतलब है कि बीजेपी और लेफ्ट समेत कई पार्टियां पीएम को लोकपाल के दायरे में लाने की मांग कर रही थीं। ऐसे में काफी चर्चा के बाद समिति ने तीन विकल्प सुझाए हैं: बिना किसी अपवाद और योग्यता के लोकपाल के दायरे में लाना, पीएम के पद से हटने के बाद बिना किसी छूट के दायरे में लाना और राष्ट्रीय सुरक्षा व विदेशी मामलों जैसे मुद्दों पर छूट के साथ दायरे में लाना।

हालांकि समिति का जोर तीसरे विकल्प पर है। अंतिम फैसले की जिम्मेदारी संसद पर छोड़ दी गई है। रिपोर्ट में राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी इसके दायरे में लाने की सिफारिश की गई है। वहीं, जुडिशरी को इसके दायरे से बाहर रखने पर ही सहमति बनी है, जबकि राज्यों के ग्रुप सी और डी के कर्मचारियों को लोकायुक्तों के तहत लाने की सिफारिश की जा रही है।

केंद्र के ग्रुप सी और डी कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे से बाहर रखने को कहा गया है। स्थायी समिति ने सीबीआई निदेशक की वर्तमान चयन प्रक्रिया में बदलाव न करने का भी निर्णय लिया है। बाकी सिफारिशों के मुताबिक, समिति ने लोकपाल को चुनने के लिए बने सात सदस्यीय सर्च पैनल में 50 फीसदी आरक्षण एससी/एसटी, ओबीसी, अल्पसंख्यकों और महिलाओं के लिए करने का समर्थन किया है। सर्च पैनल बनाना जरूरी होगा।

समिति की 199 पेज की फाइनल रिपोर्ट मंगलवार को सदस्यों को भेजी गई। सूत्रों का कहना है कि यदि कमिटी बुधवार को अपनी बैठक में रिपोर्ट को हरी झंडी देती है तो इसे 9 दिसंबर को संसद में पेश किया जा सकता है। इसका नाम लोकपाल/लोकायुक्त बिल 2011 हो सकता है। समिति के अध्यक्ष अभिषेक मनु सिंघवी ने मंगलवार को कहा कि समिति देशहित में अपनी रिपोर्ट तैयार कर रही है, न कि किसी संगठन या शख्स को खुश करने के लिए।

सिंघवी ने इससे इनकार किया कि लोकपाल बिल को संसद में पेश करने में देरी की जा रही है। उन्होंने कहा कि कुछ प्रक्रियागत कारणों और रिपोर्ट का अनुवाद कराने के लिए कुछ समय मांगा गया है। इसे देरी कहना ठीक नहीं होगा।

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