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कौन नहीं था आंदोलनकारी

नौसेना की बड़ी उपलब्धि अदन की खाड़ी में सोमालिया की समुद्री डाकुओं का आतंक जारी है, इसी को ध्यान में रखकर भारतीय नौसेना ने अपने जहाज आईएनएस तबर को खाड़ी में निगरानी के लिए तैनात किया था, जिसे बीते दिनों एक बहुत बड़ी कामयाबी मिली एवं तब्ोसे समुद्री डाकुओं के एक मदर वोट जो हथियारों से भरा था एवं जिसके सहार वे डकैती को अंजाम देते थे, उसे तबर ने एक मुठभेड़ में मार कर डुबो दिया। ज्ञात हो कि समुद्री डकैतों के पास दो ही मदर वोट थीं, उसके सहार चलने वाली स्पीड वोट को भी उन्होंने नष्ट कर दिया, इससे भारतीय नौसेना का हौसला बढ़ा, वहीं डाकुओं के हौंसले पस्त हुए। राकेश उपाध्याय, नई दिल्ली लोकतंत्र में आस्था दिखाई अमरनाथ विवाद से उपजे आंदोलन ने जम्मू-कश्मीर के बीच खाई उत्पन्न कर दी थी, परंतु जम्मू-कश्मीर में कश्मीरियों ने अलगाववादियों के चुनाव बहिष्कार करने की अपील को सिर से खारिा कर चुनाव प्रक्रिया में भाग लिया और विश्व को जता दिया कि हमें आतंक, अलगाववाद नहीं एक विकसित, सभ्य, शिक्षित समाज चाहिए। इस लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेकर अलगाववादियों को बिल्कुल नकार दिया है। दिलीप कुमार झा, नई दिल्ली अकल ठिकाने लगाएं पाकिस्तान की नापाक जमीं से भारतवर्ष की संप्रभुता पर मुम्बई में करवाये गये आतंकी हमलों में जो अनमोल जानें गयी हैं, उसकी भरपाई केन्द्र-राज्य सरकारों की मुआवजा राशि से कदापि संभव नहीं है। दहशतगर्दो के आगमन की पूर्व सूचना हमारी खुफिया एजेंसियां नहीं दे पायीं, इससे बड़ी लापरवाही पहल कभी नहीं देखी गयी। मुम्बई के दर्द की टीस से समस्त देशवासी के प्रभावित परिवारों से पूरी सहानभूति है। युगल किशोर शर्मा, खाम्बी, फरीदाबाद वोट डालने पर जनता गम्भीर वोट डालना हर नागरिक का महत्वपूर्ण अधिकार है। वोट का विकल्प अन्य अधिकार नहीं ले सकता। पिछले कुछ दशकों में जनता ने जाने-अनजाने इस अधिकार की अनदेखी की है, जिसके कारण वोट डालने का औसत प्रतिशत 55 से 65 के बीच ही रहा है। वोट डालने के अधिकार का वास्तविक अर्थ कश्मीरी जनता ने देश के सामने रखा है। भूपेन्द्र रतूड़ी, हरिद्वारं

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