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लोकपाल के दायरे में पीएम पर संसद करेगी फैसला

लोकपाल के दायरे में पीएम पर संसद करेगी फैसला

प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे के तहत लाए जाने के मुद्दे पर तीखे मतभेद होने के बीच संसद की स्थायी समिति ने इस मामले का हल निकालने का काम संसद पर छोड़ दिया है।

समिति ने पहले समूह सी के अधिकारियों को लोकपाल के दायरे में रखने का निर्णय किया था, लेकिन अब इसकी सिफारिशों में इस वर्ग को अलग रखने के लिए कहा गया है। कार्मिक, कानून एवं विधि संबंधी संसदीय स्थायी समिति के सदस्यों को आज वितरित की गई 199 पृष्ठों वाली मसौदा रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाने या बाहर रखने के बारे में मोटे तौर पर तीन दृष्टिकोण सामने आए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया कि इन मतों को विकल्प के तौर पर देखा जाना चाहिए और किस विकल्प को अपनाया जाए, इसका फैसला संसद की भावना पर छोड़ दिया जाना चाहिए। अंतिम मसौदा रिपोर्ट में कहा गया कि लिहाजा प्रत्येक विकल्प के पक्ष या विपक्ष मे विभिन्न दलों पर बहस करना निर्थक रहेगा। सच बात है कि प्रत्येक विकल्प में युक्तिसंगत गुण है और अवगुण के भी कुछ क्षेत्र हैं।

एक मत का कहना है कि प्रधानमंत्री को पूरी तरह से बाहर कर दिया जाना चाहिए। दूसरे मत के अनुसार उन्हें शामिल करना चाहिए लेकिन उसमें कुछ सुरक्षा उपाय होने चाहिए। तीसरे विकल्प के अनुसार प्रधानमंत्री को इस शर्त पर शामिल किया जाना चाहिए कि उनके खिलाफ कार्रवाई:अभियोजन केवल तभी हो जब वह अपना पद छोड़ दें।

प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाने के मामले में कुछ सदस्यों ने जो सुरक्षा उपाय सुझाए हैं उनमें राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेशी मामले, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष के मुद्दे शामिल हैं। यह भी सुझाव दिया गया है कि इस संदर्भ में सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय हित को भी सुरक्षा उपाय के रूप में शामिल किया जाना चाहिए।
समिति ने सिफारिश की है कि केन्द्र में समूह सी और डी वर्ग के अधिकारियों को विशेषतौर पर केन्द्रीय सतर्कता आयोग के दायरे के तहत लाया जाना चाहिए। उसने कहा कि सीवीसी को समूह सी और डी वर्ग के अधिकारियों के मामले में उसी तरह या लगभग मिलती-जुलती शक्तियों के इस्तेमाल का अधिकार मिलना चाहिए जैसा कि लोकपाल के पास समूह ए और बी श्रेणी के कर्मचारियों के मामले में रहेगा।

पैनल ने पहले समूह सी के कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में लाने का निर्णय किया था, लेकिन समिति के कांग्रेस सदस्यों के कड़े विरोध के बाद अगले ही दिन समिति ने अपने विचारों को बिल्कुल बदल लिया। अंतिम मसौदे में समिति ने सिफारिश की है कि केन्द्र में समूह सी और डी वर्ग के अधिकारियों के समकक्ष राज्य सरकार के अधिकारियों को राज्य लोकायुक्तों के अधिकार क्षेत्र में लाया जाना चाहिए। उन्हें दायरे से अलग नहीं किया जाना चाहिए। समिति ने कहा कि राज्य के स्वामित्व या नियंत्रण वाले निकायों को भी इसके तहत लाया जाना चाहिए।

 

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  • Web Title:लोकपाल के दायरे में पीएम पर संसद करेगी फैसला