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फुल जा रहीं हैं मुंबई की ट्रेनें

गाड़ी बुला रही है, सीटी बजा रही है, चलना ही जिंदगी है, चलती ही जा रही है। कुछ यही कहानी है उन लोगों की जो काम को भगवान मानते हैं। मुंबई में हुए आतंकी हमलों की गूंज भले ही फिााओं में सुनाई दे रही हो लेकिन जिंदगी इससे रुकती तो नहीं। गाड़ी वही है, गंतव्य वही बस उसमें जानेवाले लोग बदलते हैं। पटना जंक्शन व राजेंद्र नगर टर्मिनल पर इसको सुबह व रात दोनों समय महसूस किया जा सकता है। राजेंद्र नगर-लोकमान्य तिलक टर्मिनल सुपरफास्ट एक्सप्रेस हो या पटना-कुर्ला एक्सप्रेस। दोनों ही ट्रेनों में स्लीपर क्लास में यात्रा करने के लिए आपको एक सप्ताह इंतजार करना पड़ेगा। एसी बोगियों में जाना चाहते हैं तो इंतजार की अवधि और अधिक होगी।ड्ढr ड्ढr आतंकवादियों ने लोगों के मनोबल को तोड़ने का लाख प्रयास किया, लेकिन बिहारी कहां मानने वाले हैं। यही वजह है कि 2142 लोकमान्यतिलक सुपरफास्ट में एसी थ्री व टू में 17 दिसंबर तक सीटें उपलब्ध नहीं हैं। इस ट्रेन की स्लीपर क्लास की सीटें भी सात दिसंबर तक फुल हैं। 3201 कुर्ला एक्सप्रेस के 15 दिसंबर तक एसी थ्री व टू में जगह नहीं है। इस ट्रेन का स्लीपर क्लास भी पांच दिसंबर तक भरा हुआ है।ड्ढr ड्ढr मुंबई की घटना के प्रथम दिन से अभी तक मुंबई जानेवाली ट्रेनों की पूरी जानकारी लेने के क्रम में हिन्दुस्तान की टीम ने पाया कि किसी दिन टिकट कैंसिल कराने का मामला प्रकाश में नहीं आया। आम दिनों की भांति 27 नवंबर को तीन व 28 नवंबर को 15 टिकट कैंसिल हुए थे। मुंबई जा रहे मधुकर कुमार ने बताया कि जाना तो है ही। किसी की डर से नौकरी नहीं छोड़ सकता। रत्नेश का कहना है कि मरना होगा तो कहीं भी मर जायेंगे। मौत के डर से कर्म करना कोई कैसे छोड़े।

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