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गतिरोध तोड़ने के लिए सरकार ने बुलाई सर्वदलीय बैठक

गतिरोध तोड़ने के लिए सरकार ने बुलाई सर्वदलीय बैठक

बहु-ब्रांड खुदरा कारोबार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति के फैसले पर बने संसदीय गतिरोध को समाप्त करने के लिए सरकार ने बुधवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। सरकार ने यह कदम इस मसले पर अपने कुछ सहयोगियों और विपक्ष से कई दिनों तक चली बातचीत के बाद उठाया है।

इस तरह के संकेत हैं कि सरकार ने एफडीआई के विवादास्पद फैसले को फिलहाल रोक कर रखने का निर्णय लिया है और वह इस मसले पर संसद में बयान दे सकती है। सर्वदीलय बैठक इन संकेतों के बीच होने वाली है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता राजनाथ सिंह ने कहा कि राजनीतिक दलों के सदन के नेताओं की बैठक संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले बुधवार सुबह 9.30 बजे होगी। संसद का शीतकालीन सत्र चार दिनों के अवकाश के बाद शुरू होगा।

इस सिलसिले में केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने सोमवार को भाजपा के वरिष्ठ नेताओं लालकृष्ण आडवाणी एवं सुषमा स्वराज और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता सीताराम येचुरी से बात की थी। माना जाता है कि मुखर्जी ने एफडीआई पर हुए फैसले को रोकने के सरकार के निर्णय से उन्हें अवगत कराया और संसदीय कार्यवाही सुचारु ढंग से चलाने में उनसे सहयोग की मांग की।

वहीं, विपक्ष के नेताओं ने सुझाव दिया कि सरकार को इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए। स्वराज ने भी संकेत दिया है कि उनकी पार्टी सरकार पर दबाव बनाती रहेगी और एफडीआई पर उसके फैसले को वापस लेने की मांग करेगी अथवा सरकार को स्थगन प्रस्ताव के तहत इस मसले पर चर्चा के बाद मत विभाजन के लिए तैयार होना चाहिए।

मुखर्जी ने शनिवार को तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सूचित किया था कि सरकार आम सहमति बनने तक एफडीआई पर हुए फैसले को रोके रखेगी। उल्लेखनीय है कि कालाधन, महंगाई और एफडीआई सहित अन्य मुद्दों पर विरोध और हंगामे के चलते संसद के शीतकालीन सत्र का करीब आधा समय नष्ट हो चुका है।

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