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जलवायु परिवर्तन समझौते के केंद्र में हो निष्पक्षता: नटराजन

जलवायु परिवर्तन समझौते के केंद्र में हो निष्पक्षता: नटराजन

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयंती नटराजन ने कहा है कि भारत कानूनी रूप से बाध्यकारी एक नई संधि पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन निष्पक्षता का सिद्धांत इसके केंद्र में होना चाहिए।

नटराजन ने सोमवार रात एक अन्य कार्यक्रम के दौरान कहा, ‘हम खुले दिमाग से डरबन आए हैं, लेकिन मैं यह जानना चाहूंगी कि क्या यह केवल शमन के लिए बाध्यकारी है और क्या यह एनेक्स-1 (विकसित) और गैर एनेक्स-1 (विकासशील) देशों के लिए समानरूप से बाध्यकारी है या नहीं।’

भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहीं नटराजन ने सोमवार को कहा, ‘हम जलवायु संरक्षण के लक्ष्य के किसी समाधान के खिलाफ नहीं हैं।’ नटराजन ने सवाल किया, ‘इस लक्ष्य को हासिल करने से पहले मेरे लिए यह जानना आवश्यक है कि जलवायु परिवर्तन वार्ता में निष्पक्षता कितनी होगी? बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) का मुद्दा कैसे उठेगा और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण व एकतरफा व्यापारिक उपाय कैसे सामने आएंगे। मैं इस बात का भी उत्तर चाहूंगी कि वे विकासशील देशों के विकास की जरूरत को कितना पूरा करेंगे।’

यह आयोजन केंद्रीय पर्यावरण मंत्रलय और सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) द्वारा आयोजित किया गया था। नटराजन ने निष्पक्षता के मुद्दे पर जोर दिया और कहा कि इसे किसी भी बहस के केंद्र में होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘हम यहां कोई समाधान निकालने के लिए आए हैं और इसके लिए वचनबद्ध हैं। निष्पक्षता जलवायु परिवर्तन वार्ता का केंद्र है और हम इसी में विश्वास करते हैं। हम इसे केवल जलवायु जरूरत के रूप में नहीं लेते, बल्कि सामाजिक जरूरत और विकास सम्बंधी जरूरत के रूप में भी लेते हैं।’

नटराजन ने कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन के लिहाज से बहुत संवेदनशील, लेकिन यहीं पर इसे विकास करने का भी अधिकार है। नटराजन ने उन रपटों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि भारत को समझौता तोड़ने वाले देश के रूप में देखा जा रहा है।

 

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