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कांग्रेस ने खेला मुस्लिम कार्ड, काट तलाशने में जुटीं पार्टियां

कांग्रेस ने खेला मुस्लिम कार्ड, काट तलाशने में जुटीं पार्टियां

मुस्‍लमानों के लिए आरक्षण का प्रावधान करने के प्रस्ताव से अगले साल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिलने वाले संभावित लाभ की काट ढूंढने में राज्य के प्रमुख राजनीतिक दल जुट गए हैं।
    
कांग्रेस नीति केंद्र की संप्रग सरकार पिछड़े वर्ग के कोटे से अल्पसंख्यक समुदाय के लिए आठ फीसदी से अधिक के आरक्षण के प्रावधान की तैयारी कर रही है। माना जा रहा है कि इसमें से मुसलमानों के लिए छह फीसदी आरक्षण होगा। आरक्षण के इस प्रस्तावित कदम को आने वाले विधानसभा चुनावों, खासकर उत्तर प्रदेश के चुनाव को देखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होना है और ऐसे में कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी मुस्लिम मतदाताओं के बीच पार्टी की साख को ज्यादा से ज्यादा मजबूत बनाने की कोशिश में जुटे हैं।
    
मुस्लिम मतदाताओं को रिझाने की यह कोशिश समाजवादी पार्टी (सपा) को सबसे ज्यादा अखर रही है क्योंकि उसकी उम्मीदें भी इस बार इसी तबके पर टिकी हुई हैं। सपा के एक नेता का कहना है कि कांग्रेस के आरक्षण के कार्ड की काट ढूंढने में पार्टी जुटी है और शीर्ष नेतृत्व किसी भी सूरत में कांग्रेस को मुसलमानों का हमदर्द होने का तमगा मिलने नहीं देना चाहता है। कहा जा रहा है कि सपा विधानसभा चुनाव के लिए जारी होने वाले घोषण पत्र में सबसे ज्यादा ध्यान मुस्लिम मतदाताओं पर ही केंद्रित करने वाली है।
    
इस बारे में सपा के राष्ट्रीय सचिव कमाल फारूकी ने कहा कि मुस्‍लमानों को आरक्षण देने की बात बेवकूफ बनाने की एक कोशिश भर है। हम जनता के बीच इसका जवाब देंगे। इसके लिए हमारी योजना तैयार है। फारूकी ने कहा कि हमारा सवाल यह है कि जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकार है, वहां मुस्‍लमानों के कल्याण के लिए क्या किया गया है। कांग्रेस के शासन में मुस्‍लमानों की हालत और खराब हुई है। आरक्षण की बात करके कांग्रेस के लोग मुस्‍लमानों को फिर से बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इस बार मुस्‍लमान उनके जाल में फंसने वाला नहीं है।
    
सपा के अलावा बसपा की निगाहें भी मुसलमान मतदाताओं पर हैं। सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय का नारा देकर पिछली बार स्पष्ट बहुत हासिल करने वाली बसपा बीते कुछ दिनों से मुसलमानों को आरक्षण देने की मांग जोर-शोर से कर रही है। बसपा प्रमुख और उप्र की मुख्यमंत्री मायावाती मुस्‍लमानों को आरक्षण देने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री को पत्र भी लिख चुकी हैं। उनके विरोधी दलों का आरोप है कि बसपा आरक्षण का श्रेय अपने माथे पर सजाना चाहती है और मायावती का पत्र महज दिखावा भर है।
   
राज्य में तेजी से उभर रही पीस पार्टी का आधार भी मुसलमान मतदाता है और वह भी कांग्रेस के आरक्षण कार्ड की काट तलाश रही है। पीस पार्टी के अध्यक्ष मोहम्मद अयूब कहते हैं कि हम मुस्‍लमानों को आरक्षण देने के पक्षधर हैं, लेकिन इसे मुस्लिम समाज के विकास के लिए नाकाफी मानते हैं। यह कांग्रेस का चुनावी स्टंट है और इसके बारे में हम जनता को बताएंगे।
   
उधर, बीते सोमवार को राहुल ने राज्य की पार्टी इकाई के मुस्लिम नेताओं के साथ एक बैठक की थी। कहा जा रहा है कि इस बैठक में राहुल ने कांग्रेसी मुस्लिम नेताओं से कहा कि वे अपने समाज के बीच जाकर कांग्रेस की ओर से किए गए अथवा किए जा रहे कार्यों के बारे में बताएं।

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