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‘मुंबई में आतंकी, कोसी में बाढ़’ कोई फर्क नहीं!

सुबह-सुबह अखबार का खेल पेज खोलते ही इंग्लिश क्रिकेट टीम के कप्तान केविन पीटर्सन का बयान नजर आया। ‘मुझे मेरी जिंदगी ज्यादा प्यारी है’। यह बयान उन्होंने मुंबई में आतंकी घटना के बाद टेस्ट सिरीज खेलने के लिए उनकी टीम के वापस भारत आने की संभावना पर दिया था। थोड़ी ही देर बाद हम रलवे स्टेशन पर थे। यह देखने के लिए कि मुंबई की घटना के बाद वहां जाने वाले कितने हैं और हैं तो उनके मन में क्या चल रहा है? प्लेटफार्म पर ज्यादा भीड़ नहीं थी। सामने दादर खड़ी थी। ट्रेन में बैठने की तैयारी कर रहे लोगों से पूछा- आप मुंबई जा रहे हैं? नहीं हम वहां नहीं जा रहे। एक बोगी में भी घुसकर वही सवाल पूछा। फिर वही जवाब मिला। अब पीटर्सन का वह बयान याद आने लगा। लगा आतंकियों के कहर ने शायद सच में मुंबई को अलग श्रेणी में ला दिया है। तभी एक सज्जन दिखे। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी मुंबई जा रही हैं। फिर जिस बोगी में वह लेकर गए वहां मुंबई जाने वालों में केवल उनकी पत्नी ही नहीं थीं और भी कई थे जिनकी संख्या एक, दो, चार, आठ नहीं उससे भी ज्यादा थी। ऐसे लोग दूसरी बोगियों में भी थे जो मुंबई को घर की तरह जानते हैं। तभी तो उषा सिन्हा, स्वाति, डा. लक्ष्मण, लीला देवी मुंबई की घटना को एक अनहोनी मानते हैं जो कहीं भी हो सकती है। वे पूछते हैं कि ‘ऐसी घटना उनके शहर में हो जाए तो क्या शहर छोड़ देंगे। मुंबई उनके लिए घर का एक कमरा है।’ हमने भी मुंबई की घटना को 2611 नाम दिया, अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले की तरह जिसे लोग े रूप में जानते हैं। लेकिन और 2611 में अंतर है। अमेरिका में हुई उस घटना को आज भी वहां के लोग बरसी के रूप में याद कर आंखें नम कर लेते हैं लेकिन 2611 जसी कितनी घटनाएं भारतीयों ने देखी और भुला दीं। अमेरिकी लोग गलत नहीं हैं लेकिन आंखों में आंसू लाने वालों का हौसला तो जरूर बढ़ता है। यही वह अंतर हैोिसके बल पर मुंबई जाने के लिए ट्रेन में सवार यात्रियों के चेहर विश्वास से भर थे। इसी विश्वास के बल पर चिलियम कहते हैं कि मैं चार साल से वहीं रह रहा हूं। इन घटनाओं से कोई फर्क नहीं पड़ता है। प्रशांत को वहां जाना अच्छा लग रहा है और ऋचा और प्रीति लाठ को मुंबई जाने के नाम पर कोई चिंता नहीं है। वे कहते हैं कि ‘ऐसी घटनाएं होती रहती हैं लेकिन जिंदगी रुकती नहीं है। कोसी में आई बाढ़ के बाद क्या लोग वहां रहना छोड़ देंगे? यही वह जज्बा है जो भारतीयों को विशेष बनाता है, मुंबई में आतंकी घटना के बाद भी और बिहार में कोसी की प्रलयंकारी बाढ़ के बाद भी। शायद इसी जज्बे की कमी से इंग्लिश क्रिकेट टीम 5-0 से पिट गई।

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