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एफडीआई पर सरकार जल्दी में क्यों: आडवाणी

एफडीआई पर सरकार जल्दी में क्यों: आडवाणी

एचटी लीडरशिप समिट में बोलते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने रिटेल सेक्टर में एफडीआई का विरोध करते हुए कहा कि सरकार इतनी जल्दी में क्यों है, जब इसके खिलाफ पूरा देश है। उन्होंने कहा कि मुझे यह समझ में नहीं आता कि सरकार को वॉलमार्ट को देश में लाने में क्या दिलचस्पी है, वह भी तब जब इससे बड़े पैमाने पर बेरोजगारी फैलेगी।

उन्होंने कहा कि एफडीआई के विरोध में भारत बंद जिस तरह से सफल रहा, उससे साफ पता चलता है कि पूरे देश में इसके खिलाफ गुस्सा है और जनता इसके खिलाफ है। उन्होंने कहा कि अमेरिका से परमाणु करार से अभी देश को कोई फायदा नहीं हुआ है, और अब ये रिटेल में एफडीआई के लिए सरकार प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि जब मैं देश में बढ़ रहे करोड़पतियों और अरबपतियों की सूची देखता हूं तो मुझे निराशा होती है कि आम आदमी की स्थिति अभी बहुत नहीं बदली है। उन्होंने शाइनिंग इंडिया स्लोगन पर अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा कि दरअसल यह यात्रा 'भारत उदय' यात्रा थी और किसी ने इसका अंग्रेजी अनुवाद शाइनिंग इंडिया किया, जोकि गलत था। इसे दरअसल इमर्जिंग इंडिया होना चाहिए था।

2जी स्पेक्ट्रम घोटाले को देश में अब तक का सबसे बड़ा घोटाला करार देते हुए कहा कि इससे देश की छवि खराब हुई। भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में इस तरह का घोटाला नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि वोट के लिए नोट कांड भी ऐसा ही एक बड़ा कांड था।

उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में सिर्फ दो ऐसे शर्मिंदगी भरे पल रहे, एक 1975-77 में इमरजेंसी का काल औऱ दूसरा सरकार बचाने के लिए सांसदों को रिश्वत देने की घटना। उन्होंने कहा कि इसके द्वारा एक विदेशी देश के साथ हो रहे परमाणु करार को संसद में पारित कराया गया, जिसके खिलाफ संसद का बहुमत था।

उन्होंने कहा कि जब मेरी पार्टी के तीन सांसद जिन्होंने इस स्कैंडल को दुनिया के सामने लाया और उनमें से ही दो को गिरफ्तार कर लिया गया, तो मुझे गहरा धक्का लगा। मैंने इसके खिलाफ अपना विरोध संसद में दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि दुनिया के दूसरे लोकतांत्रिक देशों में इस तरह का काम करने वाले लोगों को सरकार कानूनी सहायता दी जाती है, न कि जेल में डाला जाता है।

उन्होंने कहा कि इसके विरोध स्वरूप मैंने सरकार को कहा कि अगर मेरी पार्टी के सांसद गलत हैं और मैंने उन्हें गलत करने से नहीं रोका तो मैं उनसे बड़ा दोषी हूं, इसलिए सरकार को मुझे जेल में डालना चाहिए। इसके बाद ही मैंने 40 दिन की जनचेतना यात्रा निकालने की घोषणा की।

आडवाणी ने कहा मेरी सभी यात्राओं में जनता का अपार समर्थन मिला। उन्होंने कहा कि मेरी पिछली छह यात्राओं में जनचेतना यात्रा सर्वाधिक सफल रही। इन यात्राओं से मैंने बहुत कुछ सीखा। मुझे जनता से बहुत कुछ जानने को मिला।

उन्होंने कहा कि मेरी यात्राओं का एकमात्र उद्देश्य जनता तक पहुंचना था। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के एक के बाद एक मामले आने से जनता में काफी निराशा का भाव था, इसलिए मैं चाहता था कि जनता इस निराशा के भाव से बाहर निकल सके, और आशा से भरा हो, यही विकास की कुंजी है। उन्होंने कहा कि 2011 घोटालों का साल रहा है, मेरा मानना है कि 2012 जिम्मेदारी का वर्ष हो।

उन्होंने अपने पिछली यात्राओं की चर्चा करते हुए कहा कि मेरी पिछली यात्राओं का भी उद्देश्य समय समय पर जनता तक अपनी बातों को पहुंचाना और उनकी समस्याओं को सुनना होता है। उन्होंने 1997 के स्वर्णजयंती यात्रा को याद करते हुए कहा कि वह यात्रा आजादी के 50 साल पूरे होने पर शहीदों को याद करना था, और जनता को आजादी के महत्व को समझाना था।

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