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राज की अर्जी खारिज, गैर जमानती वारंट जारी

झारखंड में जमशेदपुर की एक अदालत ने छठ पर्व तथा बिहार के लोगों के बारे में अपमानजनक टिप्पणी से जुड़े मामले में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे को व्यक्ितगत पेशी से छूट देने की अर्जी को खारिज करते हुए उनके खिलाफ नए सिरे से गैर जमानती वारंट जारी कर उन्हें 18 दिसंबर तक पेश होने का आदेश दिया। प्रथम श्रेणी के न्यायिक दंडाधिकारी एके तिवारी की अदालत ने राज के वकीलों की आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 317 के तहत दी गई उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें इससे संबंधित एक मामले का निर्णय झारखंड हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति डीके सिन्हा की अदालत में सुरक्षित रखे जाने तथा बिहार और झारखंड की प्रतिकूल स्थिति का हवाला देते उन्हें यहां व्यक्ितगत पेशी से छूट देने का आग्रह किया गया था। राज के वकील आरके सिंह ने बताया कि अदालत ने उनकी अर्जी खारिज करते हुए उनके मुवक्िकल के खिलाफ एक बार फिर गैर जमानती वारंट जारी कर दिया और मुंबई के पुलिस कमिश्नर से उन्हें यहां अगली तिथि 18 दिसंबर तक पेश करने का आदेश दिया। ज्ञातव्य है कि एक स्थानीय वकील हामिद रजा द्वारा दायर इस मामले में इसी अदालत ने 30 सितंबर को भी गैर जमानती वारंट जारी कर उन्हें 17 नवंबर तक अदालत में पेश करने को कहा था पर राज ने मुंबई की मझगांव अपर मेट्रोपोलिटन अदालत से 30 नवंबर तक अंतरिम जमानत ले ली थी। स्थानीय वकील हमीद रजा की आेर से गत दो फरवरी को दायर इस मुकदमे में आरोप लगाया गया था कि ठाकरे ने 31 जनवरी को बिहारियों के पवित्र पर्व छठ तथा उत्तर भारतीयों के बारे में अपमानजनक बयान जारी कर हिंसा और वैमनस्य फैलाने का काम किया।ड्ढr उनके खिलाफ उत्तर भारतीयों के अपमान से जुड़े एक अन्य मामलें में यहां की एक और अदालत ने सुनवाई की अगली तिथि छह दिसंबर तय की है। झारखंड के सभी मामलों को एक जैसा बताते हुए इसे महाराष्ट्र स्थानांतरित करने की उनकी अर्जी पर ही हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है।

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