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सात्विक विचार के खतरे

एक दिन चलते-चलते हमारा डिश आउट हो गया। टीवी क्या आउट हुआ, लगा पूरे घर में एक अजीब सा सन्नाटा छा गया है। ऐसा लगने लगा कि लाईफ में चौबीस घंटे बहुत होते है अपने पास टाईम ही टाईम है। आँख शरीर से विरोध करने लगीं जस कह रही हों खुराक पूरी करो। हमन कस्टमर केयर से इस जादू के पिटारे को चालू करन का अनुरोध कर डाला। पहले दिन हम बड़े आशावादी रहे, गहराई में जाने पर पता चला मामला टेढ़ा है और कस्टमर केयर के विज्ञापन में दिखाया जाने वाला सच गंज के सिर पर बाल आन के दाव की तरह है। वैकिल्पक व्यवस्था के अंतर्गत आउट डेटेड हो चुके एंेटिना के तार जुड़ चुके थे। वह डी डी और संस्कार जसे चैनेल प्रसारित कर रहा था। पता ही नहीं चल रहा था कि कौन से नए अपराध घटित हुए और कौन सी समस्यायों में देश उलझा है। मेरे बातचीत के लहजे में आदर सम्मान बढ़ गया था। मैं डॉक्टर के पास रुटीन बीपी चेक कराने पहुंचा तो वह चौंक गया। आजकल कौन सी दवा ले रहे हैं? इतना नार्मल रिजल्ट तो कभी नहीं आया। इधर कोलेस्ट्राल और थायरायड संतुलित हो चले थे चेहरे पर हमेशा विद्यमान रहने वाली लकीरं कम हो गई थीं। बास से रिलेशन सुधर गये थे, वह बदला नहीं था, बल्कि हमारे बहस करन की आदत में कमीं आई थी। लंच आवर्स में उन्हें एक दो गीता के श्लोक भावार्थ सहित सुना देता था। लोग इस परिवर्तन से चिंतित थे। कई पड़ोसी तो यहां तक पूछ गए भाई साहब सब ठीक तो है। अब तक बॉस मेरी विनम्रता से आजिज आ चुके थे। वे अब फिर डांट रहे थे, लोग इतने सात्विक हो गए तो ऑफिस के काम का क्या होगा? तुम तो आफिस का कल्चर खराब कर दोगे। बच्चे भी कॉलोनी के माहौल से एडास्ट नहीं कर पा रहे थे, व कहते पापा हम लोग मेनस्ट्रीम में कब लौटेंगे । सो मैंने डिश रिवाईवल के लिय कमर कस ली। किसी तरह तकनीकी खराबी दूर होने से जादू का बक्सा चल गया और मैं नए जमानें में लौट आया फिर वे ही न्यूज सीरियल चालू हो गए। आज डॉक्टर साहब मेरा बढ़ा हुआ बीपी देख कर खुश थे। पड़ोसी शर्मा जी हमारे देर से सो कर उठने पर फिर से प्रसन्नता मना रहे थे। आज ही फिर मेरा बॉस से झगड़ा हो गया और उसने पूरे स्टाफ को पार्टी दी। सब को भरोसा हो गया था कि अब मैं नार्मल हो गया हूं और चिंता की कोई बात नहीं है।

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  • Web Title: सात्विक विचार के खतरे