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लोकपाल को संवैधानिक संस्था बनाने के पक्ष में हजारे

लोकपाल को संवैधानिक संस्था बनाने के पक्ष में हजारे

अन्ना हजारे ने गुरुवार को कहा कि कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के सुझाव के मुताबिक लोकपाल को संवैधानिक संस्था बनाने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते इसमें सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं हो।

हजारे ने कहा कि निर्वाचन आयोग की तरह लोकपाल को संवैधानिक संस्था बनाने के मैं खिलाफ नहीं हूं। निर्वाचन आयोग स्वायत्त संस्था है, लेकिन उसकी कार्यप्रणाली में कोई भी सरकारी हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। करीब दस वर्ष पहले निर्वाचन आयोग ने सरकार को राइट टू रिजेक्ट के बारे में लिखा था, लेकिन यह अब तक कानून नहीं बना है।

एक सवाल के जवाब में भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता ने आश्चर्य जताया कि कुछ लोग प्रस्तावित लोकपाल विधेयक के दायरे में प्रधानमंत्री को लाने के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री को शामिल किया जाता है, तो लोकपाल संस्थान का दर्जा ऊंचा हो जाएगा। अगर कोई पाक-साफ है तो उसे इसके दायरे में आने से क्या डर है।

महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री सुरेश जैन से संबंधित एक अदालती केस को लेकर पुणे आये हजारे ने कहा कि लोकपाल का दायरा व्यापक होना चाहिए और इसमें निचली न्यायपालिका को भी शामिल किया जाना चाहिए ताकि भ्रष्ट अधिकारियों से त्रस्त आम लोगों को राहत मिल सके।

हजारे ने कहा कि वह दिल्ली में जंतर-मंतर पर 11 दिसम्बर को एक दिन का प्रदर्शन करेंगे क्योंकि लोकपाल पर बनी स्थायी समिति ने उनकी सभी मांगों पर विचार नहीं किया।

उन्होंने दावा किया कि उनके सहयोगी के साथ वार्ता में 50 फीसदी सांसदों ने जनलोकपाल विधेयक को अपना समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि अधिकतर राजनीतिक पार्टियां हमारे विधेयक का समर्थन कर रही हैं, तणमूल कांग्रेस और बसपा ने अभी तक अपना रूख स्पष्ट नहीं किया है।

हजारे ने आज फिर चेतावनी दी कि अगर सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में लोकपाल विधेयक पारित कराने में विफल रहती है, तो वह दिल्ली के रामलीला मैदान में 27 दिसम्बर से फिर अनशन शुरू करेंगे।

केंद्रीय कृषि मंत्री और राकांपा प्रमुख शरद पवार को पिछले महीने थप्पड़ मारे जाने पर उनकी प्रतिक्रिया के खिलाफ राकांपा कार्यकर्ताओं के दिल्ली में हुए प्रदर्शन के बारे में पूछने पर हजारे ने कहा, जिन लोगों ने महात्मा गांधी की समाधि पर मेरे खिलाफ नारे लगाये उनकी कोई नैतिकता नहीं है।

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