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CBI के हवाले इशरत जहां केस

CBI के हवाले इशरत जहां केस

गुजरात हाईकोर्ट ने इशरत जहां एनकाउंटर केस की जांच सीबीआई को सौंप दिया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने इस एनकाउंटर को फर्जी करार दिया था। हाईकोर्ट का यह फैसला गुजरात सरकार के लिए बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है।

एसआईटी के मुताबिक, राज्य पुलिस ने कॉलेज छात्रा इशरत और उसके तीन दोस्तों को फर्जी मुठभेड़ में मार गिराया और फिर उन्हें आतंकवादी बताया। मुंबई की 19 वर्षीया इशरत, जावेद शेख उर्फ प्राणेष पिल्लई, अमजद अली राणा तथा जीशान जौहर की हत्या 15 जून, 2004 की मुठभेड़ से पहले ही कर दी गई थी।

उन्हें अहमदाबाद के बाहरी इलाके में एक कार में मारा गया था। पुलिस ने बाद में उनके तार आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े होने की बात कही और दावा किया कि वे गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को मारने आए थे।

इस फर्जी मुठभेड़ में 21 पुलिसकर्मियों की संलिप्तता थी, जिसमें तत्कालीन संयुक्त आयुक्त पी. पी. पांडे, निलम्बित पुलिस उप महानिरीक्षक डी. जी. वंजारा, तत्कालीन सहायक आयुक्त जी. एल. सिंघल और सहायक आयुक्त एन. के. अमीन जैसे भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी भी शामिल थे।

पुलिस अधिकारी आर. आर. वर्मा के नेतृत्व में गठित एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद गुजरात उच्च न्यायालय 2004 के इस हत्याकांड में आरोपी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ धारा 302 के तहत नए सिरे से हत्या का मुकदमा चलाने के लिए शिकायत दायर करने का आदेश देगा, जिसमें मृत्युदंड तक का प्रावधान है।

न्यायालय ने एसआईटी की रिपोर्ट का विस्तृत खुलासा नहीं किया है, ताकि इस मामले में आगे की जांच प्रभावित न हो। न्यायालय ने इस बारे में याचिकाकर्ताओं और राज्य सरकार से भी सुझाव मांगा था कि वे उक्त दो एजेंसियों में किसकी जांच पर भरोसा करेंगे? न्यायालय ने कहा, ''जांच एजेंसी को यह पता लगाने की जरूरत है कि मुठभेड़ में किसकी प्रमुख भूमिका थी.. इसके पीछे मकसद क्या था और चारों की मौत का वास्तविक समय क्या था?''

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  • Web Title:मोदी को झटका, CBI के हवाले इशरत जहां केस