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भारत बंद के मद्देनजर दिल्ली में अधिकतर बाजार बंद

खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के विरोध में व्यापारियों की ओर से आहूत भारत बंद के मद्देनजर गुरुवार को राजधानी दिल्ली में छिटपुट दुकानें खुली रहीं लेकिन अधिकतर बाजार बंद रहे।

व्यापारियों के इस विरोध प्रदर्शन में भाजपा भी शामिल हो गई। भाजपा कार्यकर्ताओं ने शहर में कम से कम 20 स्थानों पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के पुतले फूंके।

कंफेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) के दिल्ली इकाई के अध्यक्ष नरेंद्र मदन ने कहा कि बंद में हिस्सा लेने के लिए बड़ी संख्या में व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद रखी हैं।

उन्होंने दावा किया कि सदर बाजार, कमला नगर, चावड़ी बाजार, करोल बाग, कश्मीरी गेट, तिलक नगर, रोहिणी, कृष्ण नगर और अन्य थोक और खुदरा बाजार बंद हैं। सीएआईटी के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि खुदरा क्षेत्र में एफडीआई के सरकार के निर्णय के खिलाफ आहूत इस बंद में पूरे देश के व्यापारी हिस्सा ले रहे हैं।

खंडेलवाल ने कहा कि करीब 10 हजार व्यापार संघों के करीब पांच करोड़ व्यापारी इस बंद में हिस्सा ले रहे हैं। व्यापारियों ने पूरे देश में वाणिज्यिक बाजारों में मार्च निकाला। खंडेलवाल ने कहा कि एफडीआई पर निर्णय से बाजार में असंतुलन बढ़ेगा और यह बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए फायदेमंद होगा जबकि इससे व्यापारियों और उपभोक्ताओं पर दबाव बढ़ेगा।

उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में विदेशी निवेश की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को खुदरा क्षेत्र में एफडीआई के निर्णय को वापस लेना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारतीय खुदरा क्षेत्र स्वदेशी पूंजी पर 15 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ रहा है और यह सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 10 प्रतिशत का योगदान भी कर रहा है। इसलिए एफडीआई की कोई आवश्यकता नहीं।

उन्होंने कहा कि विदेशी खुदरा बाजार बड़े शहरों में खुल सकते हैं लेकिन वे सामान तो ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे नगरों में स्थित मंडियों से लाएंगे। वे पूंजी और ताकत के बल पर उत्पादित आपूर्ति को दरकिनार करके बाहर से आने वाले माल को हावी कर सकते हैं।

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