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आखिर क्यों हटा दिए गए एटीएस के अफसर

एटीएस आतंकवाद के खिलाफ लड़ने की विशेषज्ञता वाली फोर्स है न कि जिला पुलिस, जहाँ जब चाहे अफसरों को हटा दिया जाए। आश्चर्य व गुस्से से भरी यह टिप्पणी एटीएस के एक इंस्पेक्टर की है जो एटीएस के आईाी एके जन व डीआईाी राजीव कृष्णा को एकसाथ हटाए जाने से हैरत में था। पिछले साल एक दिसम्बर को ही इन अधिकारियों को यहाँ तैनात किया गया था और अब ठीक उसी तारीख को उन्हें यह कहते हुए हटा दिया गया कि उनके पास डबल चार्ज है। हाल ही में यह दूसरा ऐसा मौका है जब राज्य के गृह विभाग और सीनियर पुलिस अफसरों ने उन अधिकारियों को बेवक्त तबादला कर दिया जब वह विशेषज्ञता वाले ऑपरशन्स को बखूबी पूरा कर रहे थे। कुछ दिन पहले ही एसटीएफ में ददुआ व ठोकिया का सफाया करने वाले एएसपी अनंत देव, इंस्पेक्टर ऋषि यादव और अनिल सिंह को स्पेशल टास्क फोर्स से हटाकर महत्वहीन पदों पर भेज दिया गया। अब एटीएस के भीतर सवाल उठ रहे हैं। एंटी टेररिस्ट स्क्वायड की उस कामयाब टीम को तोड़ा गया है जिसने रामपुर सीआरपीएफ सेंटर हमला, कचहरी बम ब्लास्ट व देश के अन्य इलाकों में हुए धमाकों के आरोपितों को गिरफ्तार कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। एटीएस के एक अधिकारी कहते हैं..पिछले एक साल के भीतर इन अफसरों ने आईबी, सीबीआई, रॉ और देश के अन्य एंटी टेररिस्ट फोर्स के अफसरों के साथ सम्बन्ध बनाए थे। ऐसी बहुत सी जानकारियाँ हैं जो इन अधिकारियों ने निजी तौर पर भी हासिल की। लिहाजा अगर इनका एक डबल चार्ज कम भी करना था तो दूसरी जिम्मेदारी ली जा सकती थी। एटीएस से इन्हें नहीं हटाया जाना चाहिए था। हालाँकि राज्य के गृह सचिव कुमार कमलेश और एडीाी कानून व्यवस्था बृजलाल का कहना है कि सभी अधिकारी सक्षम हैं और किसी भी जिम्मेदारी को संभाल सकते हैं। तबादला एक प्रशासनिक प्रक्रिया है और इसका विशेषज्ञता से कोई लेना-देना नहीं। सूत्र बताते हैं कि दो दिन पहले आतंकवाद पर हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में कुछ अधिकारियों के बीच गरमागरम बहस हुई थी। यह तबादले उसी का नतीजा हैं।

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