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हंगामेदार होगा विस का शीतकालीन सत्र

विधानसभा का शीतकालीन सत्र भी हंगामेदार होगा। दो दिसम्बर से शुरू हो रहे इस सत्र में कई मसलों पर विपक्ष ने सरकार को हमलावर अंदाज में घेरने की पूरी योजना बनाई है। खासकर कोसी की बाढ़ को लेकर सभी विपक्षी दल सरकार पर तीर चलाएंगे। महाराष्ट्र में बिहारियों पर हमला, विधि-व्यवस्था और शिक्षकों की बहाली के मामले में भी सरकार को फंसाने की कोशिश होगी। सदन का सत्र छोटा करने को लेकर भी विपक्ष आगबबूला है। विपक्ष के इरादे पिछले सत्र वाले अपने तेवर दुहराने के हैं।ड्ढr ड्ढr राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता और विधायक श्याम राक की बात से विपक्ष के इरादे भी साफ हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि सदन को शांतिपूर्वक चलाने की जिम्मेवारी सत्ता पक्ष की होती है। विपक्ष तो सहयोग ही कर सकता है। तीन दिनों के हाउस में न तो कोसी की बाढ़ पर चर्चा हो सकती है और न ही सूखा पर। विधि-व्यवस्था की स्थिति बहुत लचर है। शिक्षकों की नियुक्ित में अनियमितता और आरक्षण में घोटाला किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनता के सवालों से बचने के लिए ही राज्य सरकार ने छोटे सत्र का रास्ता चुना है। इधर कांग्रेस विधायक दल के नेता डा. अशोक कुमार ने कहा कि उनके दल के विधायक कोसी की बाढ़ से निपटने में राज्य सरकार की असफलता का मसला उठायेंगे। कानून-व्यवस्था की दुर्दशा भी उनके एजेंडे पर रहेगा। शिक्षा को लेकर भी राज्य सरकार की संवेदनहीनता के लिए उसे बख्शा नहीं जा सकता है। लोजपा विधायक दल के नेता महेश्वर प्रसाद सिंह ने भी कहा कि उनके विधायक कोसी की बाढ़, सिंचाई की समस्या और अफसरशाही जसे मसलों पर सरकार को घेरंगे। छोटे सत्र के मसले पर भी उनकी आवाज जोरदार तरीके से उठेगी। भाकपा माले के नंदकिशोर प्रसाद ने बताया कि उनके विधायक महाराष्ट्र में छात्रों और मजदूरों की पिटाई के मसले पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को कठघर में खड़ा करेंगे।

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