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एक पखवाड़े में तीन बच्चों की मौत

तापक्रम के उतार-चढ़ाव से वायरल फीवर, तेज बुखार, उल्टी और बदन दर्द से पीड़ित मरीजों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हुई है। बच्चे इसके आसान शिकार हो रहे हैं। पिछले एक पखवाड़े में रिम्स के शिशु रोग विभाग में वायरल फीवर से पीड़ित तीन बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि एक दर्जन से ज्यादा अभी भी भरती हैं। मरनेवाले बच्चों में छाया कुमारी, सरो कुमार और अक्षय कुमार शामिल हैं। राजधानी के विभिन्न इलाकों से पूनम कुमारी, दीपा कुमारी, रौशन कुमार, महादेव, आदित्य, अनूप, शंभू, पायल, अमन कुमार का इलाज रिम्स के शिशु रोग विभाग में किया जा रहा है। रिम्स के सहायक प्राध्यापक डॉ बी सिंह के अनुसार तापक्रम में अचानक होनेवाले परिवर्तन के कारण वायरल इंफेक्शन हो जाता है, जो बच्चों में श्वसन नलिकाओं में संकरेपन के कारण ब्रोंकाइटिस या निमोनिया का रूप ले लेता है। साधारण बोलचाल में फ्लू, इंफ्लूएंजा, कॉमन कोल्ड या साधारण सर्दी-बुखार को वायरल फीवर के नाम से जाना जाता है। यह एक व्यक्ित से दूसरे व्यक्ित तक सांस के माध्यम से पहुंचता है। जब मरीज खांसता है, तो इसके विषाणु पासवाले व्यक्ित के शरीर में सांस और मुंह के माध्यम से प्रवेश कर जाते हैं। और वह व्यक्ित बुखार से पीड़ित हो जाता है। डॉ सिंह के अनुसार ठंडे वातावरण, फ्रीज का ठंडा पानी, सॉफ्ट ड्रिंकस, आइसक्रीम आदि खाने से गले में सुसुप्ता अवस्था में रह रहे वायर, सक्रिय हो जाते हैं और हमारे इम्यून सिस्टो को प्रभावित करते हैं। ज्यादातर लोग साल में 4-6 बार वायरल फीवर की चपेट में आते हैं। वायरल फीवर के दौरान सिर दर्द और बदन दर्द के साथ तेज बुखार आना, गले में खराश होना, नाक में खुजली, नाक से पानी गिरना आम लक्षण हैं।

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