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‘जननी-चान्मभूमि की महत्ता सवरेपरि’

‘विश्व के कल्याण के लिए अनादि काल से यज्ञ होता आ रहा है और अखिल भारतीय सर्वमंगला परिवार लोगों को दैनिक जीवन में इसे शामिल करने के लिए जनमानस को प्रेरित कर रहा है।’ यह बात अखिल भारतीय सर्वमंगला मिथिला मैथिली विकास सेवा संघ और दिव्य शक्ित सिद्धाश्रम (सिमरियाघाट, बेगूसराय) के संस्थापक स्वामी चिदात्मन देव जी महाराज ने सोमवार को पुनौराधाम में कही। मिथिला की संस्कृति जागृत करने तथा राष्ट्र के कल्याणार्थ मिथिला परिक्रमा के चौथे दिन श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि घर-घर में महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को विधिवत हवन हो, तो उस घर से सारा संकट टल जायेगा और उसका सर्वागीण विकास होगा।ड्ढr ड्ढr उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में जननी और जन्म भूमि की महत्ता सवरेपरि है। इस भाव से वृहद मिथिला परिक्रमा विद्यापति नगर, हाजीपुर, पुनौराधाम, जनकपुर, विराटनगर, पूर्णिया और जयमंगला गढ़ होते पुन: सिद्ध आश्रम, सिमरियाघाट में पहुंच कर पूर्ण होगी। धर्मानुरागी संत महात्माओं के साथ शुरू इस परिक्रमा में हर पड़ाव पर लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। स्वामी जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति के पांचों तत्वों को मातृवत देखा गया है। उस मातृ शक्ित को प्रसन्न करने का सीधा और सरल तरीका हवन का है। वृहद मिथिला परिक्रमा के अंतर्गत अनंत श्री लक्षाहुति श्री अम्बा महायज्ञ चल रहा है। वर्ष में एक बार भी घर-घर में हवन अनिवार्य है। परिक्रमा में श्री रवीन्द्र ब्रह्मचारी, विश्वेश्वरानंद, नृपेन्द्रानंद, संजयानंद, सदानंद, धीरन्द्र, देवेश तथा डॉ. अनु झा सहित 51 लोग सहयोग कर रहे हैं।ं

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