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मुहाजिर-पख्तून खूनी संघर्ष का कारण आर्थिक हित

पाकिस्तान में एक पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत के बुनेर, बाजौर और मालाकंद इलाकों में सेना और तालिबान के बीच घमासान में तोपों और लड़ाकू हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल हो रहा है तो दूसरी ओर सिंध प्रांत के कराची शहर में उर्दू भाषी मुहाजिरों और सीमांत प्रांत से आए पख्तूनों के बीच खूनी संघर्ष चल रहा है। पिछले दो दिनों में कराची में जारी हिंसा में करीब 30 लोगों के मार जाने और 40 से ज्यादा के घायल होने की खबर है। विभाजन के बाद भारत से बड़ी संख्या में गए मुसलमानों ने कराची को अपना घर बनाया जिन्हें आज तक मुहाजिर यानी शरणार्थी कहा जाता है। इनके आने के बाद स्थानीय सिंधियों और मुहाजिरों के बीच वर्षो चले खूनी खेल में सैकड़ों की जानें गई लेकिन अब दोनों समुदायों के बीच शांति है। मुहाजिरों की पार्टी मुत्तेहिदा कौमी मुवमेंट को लग रहा है कि पख्तूनों के कराची आने से उनके आर्थिक हितों को चोट पहुंच रही है। पख्तूनों ने सड़क परिवहन के सार काम पर कब्जा कर लिया है जबकि पंजाबी प्रशासनिक सेवाओं पर हावी हैं। पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत में चल रही जंग के कारण एक अनुमान के मुताबिक पिछले कुछ महीनों में ही एक लाख से ज्यादा पख्तून कराची आ गए हैं। यूं तो कराची में एमक्यूएम कार्यकर्ता हमेशा से हिंसक रहे हैं और अब पख्तूनों के खिलाफ उन्हें सिंधियों का साथ भी मिल रहा है। पाकिस्तान मामलों के जानकार प्रो. कलीम बहादुर के मुताबिक मुहाजिरों और पख्तूनों के बीच संघर्ष लंबे समय से चल रहा है। पिछली बार 12 मई 2007 को हुए संघर्ष में 50 लोग मार गए थे। उनके मुताबिक मौजूदा संघर्ष के पीछे तालिबान का हाथ भी हो सकता है। तालिबान भी ज्यादातर पख्तून ही हैं। एमक्यूएम ने राजनीतिक पहचान भी बना ली है और मौजूदा सरकार को समर्थन दे रहे हैं। संघर्ष का एक कारण यह भी है कि एमक्यूएम तालिबान के खिलाफ हैं और गत 13 अप्रैल को नेशनल असेंबली में स्वात में तालिबान के साथ हुए समझौते पर मतदान का विरोध करते हुए वॉक-आउट किया था। चूंकि जनरल अय्यूब के जमाने से ही पख्तून भी पाकिस्तान की सत्ता में भागीदार रहे हैं और सेना में भी उनकी तादाद काफी है लिहाजा वे भी मुहाजिरों को जम कर टक्कर दे रहे हैं।ं

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  • Web Title: मुहाजिर-पख्तून खूनी संघर्ष का कारण आर्थिक हित