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अफसरों से अधिक चारूरी हैं संसाधन

एटीएस बिल्डिंग में मंगलवार को नए आईाी उस कमर में बैठेोहाँ अब तक डीआईाी बैठते थे, नए डीआईाी ने अभी वाइन नहीं किया।ोब आएँगे तो शायद वह एसपी एटीएस के कमर मेंोाएँगे और तब एसपी को भीतर कोई नया कोना तलाशना पड़ सकता है। और अभी तो मुख्यमंत्री की घोषणा के मुताबिक विस्तार होना बाकी है। शासन को अगर कैबिनेट के फैसले और मुख्यमंत्री की घोषणा कोोल्द सेोल्द धरातल पर उतारना है तो एटीएस कर्मियों के वेतनमान, संसाधनों से लेकर इस अति संवेदनशील पुलिसिंग की गोपनीयता को बरकरार रखने के लिए पेशेवर रवैया अपनाना होगा।ड्ढr गोमतीनगर में एटीएस मुख्यालय छोटी सी बिल्डिंग में है। अब तक आईाीोोन लखनऊ और आईाी एटीएस का काम आईपीएस एके ौन देख रहे थे। इसलिए आईाी एटीएस के लिए अलग दफ्तर कीोरूरत ही नहीं हुई क्योंकि श्री ौन आईाीोोन दफ्तर में बैठकर ही काम करते थे। एटीएस के पूर्णकालिक आईाी के आने से बिल्डिंग छोटी पड़ने लगी है। सूत्रों के मुताबिक एटीएस की यह समस्या तो सबसे छोटी है। असल दिक्कतें और हैं। डीआईाी और एसपी स्तर के एटीएस अफसर अपने काम में दखलंदााी और यादा पूछताछ पसंद नहीं करते। आतंकवाद सेोुड़ीोानकारियाँ बेहद संवेदनशील और अपुष्ट होती हैं। यह अफसर यादातरोानकारियों को तब ही सीनियर्स के साथ बाँटते हैंोब उसमें कुछ पुष्टि होोाए। यानी एटीएस का कुनबा यादा बढ़ा तो गोपनीयता खतर में हो सकती है।ड्ढr एक सीनियर अधिकारी का सुझाव है कि एटीएस में चारोोन बनाने से बेहतर था किोो तीन यूनिट काम कर रही थीं, उनके संसाधन बढ़ाएोाते क्योंकि इस काम में यादा अफसरों की तैनाती पेचीदगी ही पैदा करगी। एटीएस का हाल एसटीएफ ौसा भी हो सकता हैोहाँ कई पद खाली हैं। गृह विभाग के सूत्रों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में आईपीएस के 66 पदों पर कोई तैनाती नहीं है। इन पदों को भरने के लिए अधिकारी नहीं मिल रहे और अब एटीएस में दो आईाी और दो डीआईाी कीोरूरत होगी। एटीएस में काम कर चुके एक अधिकारी का कहना है कि एटीएस के विस्तार से पहले संसाधन मुहैया करायाोानाोरूरी है क्योंकि यह सामान्य पुलिसिंग नहीं है। एटीएस कर्मियों को सघन प्रशिक्षण कीोरूरत है।

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